अमेरिकी आतंकी हमले 9/11 की 25वीं बरसी से पहले सार्वजनिक की गई खुफिया फाइलों ने ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा के पुराने नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की ओर से जारी दस्तावेजों के मुताबिक, 1998 में बिन लादेन के संभावित आतंकी निशानों में भारत का नाम भी शामिल था।
इन दस्तावेजों से पता चलता है कि 9/11 हमले से करीब तीन साल पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियां बिन लादेन के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क और अलग-अलग देशों में हमले की उसकी मंशा को लेकर चिंतित थीं।
1998 की रिपोर्ट में भारत का नाम
28 अगस्त 1998 की एक प्रेसिडेंशियल इंटेलिजेंस ब्रीफ में बिन लादेन के नेटवर्क को लेकर गंभीर चेतावनी दर्ज की गई थी। रिपोर्ट का शीर्षक था “Bin Ladin Terrorist Network Still a Threat”।
इस दस्तावेज में भारत के साथ पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन और युगांडा का भी जिक्र किया गया था। नाइजीरिया को संभावित निशानों में शामिल किए जाने की बात भी सामने आई थी।
हालांकि, रिपोर्ट में भारत के किसी खास शहर, इमारत या संस्थान को निशाना बनाने की जानकारी नहीं दी गई थी। इसी तरह हमले की कोई निश्चित तारीख या विस्तृत ऑपरेशन प्लान भी दस्तावेज में मौजूद नहीं है। इसलिए इसे भारत पर हमले की पूरी तरह तैयार साजिश के बजाय बिन लादेन की संभावित हमले की मंशा से जुड़ी खुफिया चेतावनी के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।
60 से ज्यादा देशों में नेटवर्क का दावा
CIA के आकलन के अनुसार, अफगानिस्तान में मौजूद बिन लादेन और उसके सहयोगी अमेरिकी कार्रवाई के बावजूद अपना नेटवर्क बनाए रखने में सक्षम थे। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई थी कि अल-कायदा प्रमुख 60 से ज्यादा देशों में मौजूद सहयोगियों और संपर्कों का इस्तेमाल हमलों के लिए कर सकता है।
खुफिया रिपोर्ट में अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ भी संभावित हमलों की चिंता जताई गई थी। इससे संकेत मिलता है कि उस दौर में अल-कायदा की गतिविधियां केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका था।
9/11 से पहले लगातार मिल रही थीं चेतावनियां
CIA ने 1998 से 2001 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और बाद में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन को बिन लादेन और अल-कायदा से जुड़े खतरे को लेकर कई खुफिया रिपोर्ट दी थीं।
हाल में जारी दस्तावेजों का बड़ा हिस्सा इसी बात पर रोशनी डालता है कि 11 सितंबर 2001 के हमलों से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास अल-कायदा की गतिविधियों और संभावित हमलों को लेकर कई चेतावनियां मौजूद थीं। कुछ रिपोर्टों में विमान अपहरण से जुड़े प्रशिक्षण और अमेरिका में संभावित हमलों की आशंकाओं का भी उल्लेख था।
भारत के लिए क्या मायने रखता है यह खुलासा?
1998 की रिपोर्ट में भारत का नाम सामने आना यह दिखाता है कि अल-कायदा की नजर उस समय से ही कई देशों पर थी। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि भारत पर किसी खास हमले की पूरी योजना तैयार थी।
फिर भी यह खुलासा आतंकवाद के उस दौर की अंतरराष्ट्रीय तस्वीर को समझने में महत्वपूर्ण है। 9/11 के बाद दुनिया ने अल-कायदा के खतरे को जिस पैमाने पर देखा, इन दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां उसके वैश्विक नेटवर्क और मंसूबों को लेकर वर्षों पहले से चिंतित थीं।
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