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BRICS में पाकिस्तान की एंट्री क्यों अटकी? चीन के समर्थन के बावजूद भारत की क्या भूमिका

News Desk
Last updated: 2026/09/12 at 7:24 PM
News Desk
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6 Min Read
BRICS में पाकिस्तान की एंट्री
BRICS में पाकिस्तान की एंट्री
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BRICS में शामिल होने की पाकिस्तान की कोशिश अभी तक कामयाब नहीं हो पाई है। खास बात यह है कि पाकिस्तान को चीन का समर्थन हासिल है, फिर भी उसे इस समूह की पूर्ण सदस्यता नहीं मिल सकी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर BRICS में किसी नए देश को शामिल करने का फैसला कैसे होता है और पाकिस्तान की राह में सबसे बड़ी अड़चन क्या है?

Contents
BRICS में सदस्य बनने का फैसला कैसे होता है?पाकिस्तान को अब तक सदस्यता क्यों नहीं मिली?क्या भारत पाकिस्तान की एंट्री रोक सकता है?पाकिस्तान BRICS में क्यों शामिल होना चाहता है?पूर्ण सदस्यता नहीं तो पार्टनर कंट्री का रास्ताभारत के लिए क्यों अहम है BRICS का विस्तार?

दिल्ली में 2026 का BRICS शिखर सम्मेलन हो रहा है। समूह के विस्तार को लेकर भी चर्चा जारी है। इसी बीच पाकिस्तान की सदस्यता का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।

BRICS में सदस्य बनने का फैसला कैसे होता है?

BRICS में किसी नए देश को शामिल करना सामान्य बहुमत से होने वाला फैसला नहीं है। इसके लिए मौजूदा सदस्यों की सर्वसम्मति जरूरी होती है। यानी अगर किसी प्रस्तावित सदस्य के नाम पर एक भी सदस्य देश सहमत नहीं है, तो उसकी पूर्ण सदस्यता रुक सकती है।

नए देश को पहले औपचारिक तौर पर सदस्यता के लिए आवेदन करना होता है। इसके बाद उसके आवेदन पर BRICS के संबंधित मंचों और सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श होता है।

2023 में जोहानेसबर्ग शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्यता विस्तार के लिए कुछ मानदंड भी तय किए गए थे। इनमें मौजूदा सदस्य देशों के साथ सकारात्मक संबंध, बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर सहयोग जैसे पहलू शामिल हैं।

पाकिस्तान को अब तक सदस्यता क्यों नहीं मिली?

पाकिस्तान ने BRICS में शामिल होने के लिए 2023 में आवेदन किया था। इसके बावजूद वह अब तक पूर्ण सदस्य नहीं बन पाया है। इसकी सबसे अहम वजह BRICS का सर्वसम्मति वाला नियम है।

पाकिस्तान के चीन के साथ करीबी रिश्ते हैं और चीन ने उसकी BRICS में शामिल होने की इच्छा का समर्थन भी किया है। लेकिन केवल एक बड़े देश का समर्थन मिलना पर्याप्त नहीं है। सदस्यता के लिए सभी मौजूदा सदस्यों की सहमति जरूरी होती है।

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेद रहे हैं। ऐसे में BRICS की सदस्यता प्रक्रिया में भारत की भूमिका पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।

क्या भारत पाकिस्तान की एंट्री रोक सकता है?

BRICS में औपचारिक रूप से अलग-अलग देशों के लिए ‘वीटो’ की व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसी नहीं है। लेकिन सर्वसम्मति के नियम का व्यावहारिक असर यह है कि किसी नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा सदस्यों की सहमति जरूरी होती है।

यही वजह है कि भारत की सहमति BRICS के विस्तार के मामले में महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, किसी विशेष आवेदन पर भारत ने क्या रुख अपनाया है, इसे आधिकारिक बयान के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान BRICS में क्यों शामिल होना चाहता है?

पाकिस्तान के लिए BRICS सिर्फ एक कूटनीतिक मंच नहीं है। इसकी सदस्यता से उसे बड़े विकासशील देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने का मौका मिल सकता है।

BRICS के विस्तार के साथ समूह का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ा है। ऐसे में पाकिस्तान इस मंच के जरिए निवेश, व्यापार और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपने संपर्क को मजबूत करना चाहता है।

इसके अलावा, पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक मौजूदगी बढ़ाना भी एक अहम वजह मानी जाती है।

पूर्ण सदस्यता नहीं तो पार्टनर कंट्री का रास्ता

BRICS ने पूर्ण सदस्यता के अलावा पार्टनर कंट्री का विकल्प भी शुरू किया है। इसका मकसद उन देशों को समूह की कुछ गतिविधियों और बैठकों से जोड़ना है, जो अभी पूर्ण सदस्य नहीं बने हैं।

पाकिस्तान और तुर्किये को भी पार्टनर कंट्री के तौर पर जुड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, दोनों देशों की ओर से इस पर क्या अंतिम रुख रहा है, यह अलग विषय है।

भारत के लिए क्यों अहम है BRICS का विस्तार?

भारत BRICS के शुरुआती सदस्य देशों में शामिल रहा है और समूह के विस्तार में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली के लिए चुनौती यह है कि BRICS का विस्तार ऐसा हो, जिससे संगठन का प्रभाव बढ़े, लेकिन भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक हित भी सुरक्षित रहें।

यही कारण है कि पाकिस्तान की सदस्यता का सवाल केवल पाकिस्तान-चीन संबंधों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे BRICS के नियम, भारत-पाकिस्तान संबंध और समूह के भविष्य की दिशा—तीनों महत्वपूर्ण हैं।

फिलहाल, पाकिस्तान के लिए BRICS की पूर्ण सदस्यता की राह आसान नजर नहीं आती। चीन का समर्थन उसके लिए जरूर महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम फैसला सर्वसम्मति के आधार पर ही होगा।

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TAGGED: BRICS, BRICS Summit 2026, China Pakistan Relations, India BRICS, Pakistan BRICS Membership
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