पटना: समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर केंद्र की ओर से दिए गए ताजा बयान के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 से पहले BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकारों वाले सभी 21 राज्यों में Uniform Civil Code लागू किया जाएगा। इस ऐलान के बाद बिहार में NDA की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस मुद्दे पर चर्चा की जरूरत बताई है।
अमित शाह ने UCC पर क्या कहा?
अमित शाह ने रविवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान UCC को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि NDA द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य है।
शाह ने यह भी कहा कि कई राज्यों में UCC की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। केंद्र सरकार UCC को संविधान के अनुच्छेद 44 में दिए गए राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत से जोड़ती रही है।
JDU ने मांगा अमित शाह से मिलने का समय
अमित शाह के बयान के बाद बिहार में NDA की प्रमुख सहयोगी JDU की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी ने UCC जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आगे बढ़ने से पहले सहयोगी दलों के साथ चर्चा की जरूरत पर जोर दिया है।
JDU की ओर से गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात का समय मांगे जाने की बात सामने आई है। पार्टी का कहना है कि इतने संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाले मुद्दे पर सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श होना चाहिए।
यानी अमित शाह के 21 राज्यों में UCC लागू करने के लक्ष्य के बीच JDU ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर अपनी राय और चिंताओं को NDA के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखना चाहती है।
बिहार में क्यों अहम है UCC का मुद्दा?
बिहार की राजनीति में JDU लंबे समय से सामाजिक न्याय और सभी समुदायों के बीच संतुलन की राजनीति करती रही है। ऐसे में UCC जैसे मुद्दे पर पार्टी का रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खासकर 2029 की समयसीमा को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि अलग-अलग राज्यों में NDA के सहयोगी दल UCC के स्वरूप और इसे लागू करने की प्रक्रिया पर किस तरह की सहमति बनाते हैं।
UCC को लेकर क्या है विवाद?
Uniform Civil Code का उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े नियमों में एकरूपता लाना है। समर्थकों का तर्क है कि इससे नागरिकों के लिए समान कानून की व्यवस्था मजबूत होगी।
वहीं इसके विरोध या आलोचना करने वाले दल और संगठन देश की धार्मिक और सामाजिक विविधता को देखते हुए इसके संभावित प्रभावों पर सवाल उठाते रहे हैं। इसी वजह से UCC लंबे समय से देश की राजनीति में संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
NDA के भीतर बढ़ेगी बातचीत?
अमित शाह के ताजा बयान के बाद अब निगाहें NDA के सहयोगी दलों पर हैं। खास तौर पर JDU की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि UCC को लेकर गठबंधन के भीतर विस्तृत चर्चा की जरूरत महसूस की जा रही है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार इसे अपने प्रमुख नीतिगत एजेंडे का हिस्सा मानती है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमित शाह और JDU नेतृत्व के बीच संभावित बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल UCC को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2029 तक 21 NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने के लक्ष्य पर सहयोगी दलों के बीच किस तरह की सहमति बनती है। JDU की ओर से बातचीत की मांग ने इस मुद्दे को NDA की आंतरिक राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।