हरिद्वार के अजीतपुर स्थित पाठशाला के बच्चों ने मंगलवार को जनपद मुख्यालय रोशनाबाद का शैक्षिक भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित समेत प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। अधिकारियों ने बच्चों से संवाद कर उन्हें मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य तय करके आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बच्चों ने समझी प्रशासनिक कार्यप्रणाली
पाठशाला के बच्चों के लिए मंगलवार का दिन खास रहा। उन्होंने जिला मुख्यालय रोशनाबाद स्थित विभिन्न कार्यालयों का भ्रमण किया और प्रशासनिक तथा पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को करीब से समझा। किताबों से बाहर निकलकर सरकारी दफ्तरों को देखना और अधिकारियों से सीधे बात करना बच्चों के लिए नया अनुभव रहा।
वरिष्ठ अधिकारियों से हुई शिष्टाचार भेंट
भ्रमण के दौरान बच्चों ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह और एसपी क्राइम एवं यातायात निशा यादव से शिष्टाचार भेंट की। अधिकारियों ने बच्चों से बातचीत की और उनके सवालों पर ध्यान दिया।
डीएम ने दी लक्ष्य तय करने की सीख
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बच्चों से कहा कि जीवन में सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत और लगन से ही लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की सलाह भी दी। उनका कहना था कि समय का सदुपयोग पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों में किया जाना चाहिए।
पढ़ाई और अनुशासन पर एसपी क्राइम का जोर
एसपी क्राइम एवं यातायात निशा यादव ने बच्चों को पढ़ाई को प्राथमिकता देने और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मेहनत और निरंतर प्रयास से बच्चे अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।
स्वास्थ्य, स्वच्छता और समाचार पढ़ने का संदेश
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह ने शिक्षा के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और समाचार पढ़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों को समझाया कि अच्छी सेहत और साफ-सफाई भी सफल जीवन की बुनियाद है।
आत्मविश्वास बढ़ाना है उद्देश्य
सत्यम पाठशाला के संचालक अरुण कश्यप ने बताया कि बच्चों को अधिकारियों से रूबरू कराने का उद्देश्य उनके आत्मविश्वास और सामाजिक समझ को बढ़ाना है। ऐसे भ्रमण से बच्चे सरकारी व्यवस्था को जानते हैं और अपने भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य तय करने की प्रेरणा पाते हैं।
शैक्षिक भ्रमण का महत्व
स्कूल की पढ़ाई के साथ व्यावहारिक जानकारी भी बच्चों के विकास के लिए जरूरी मानी जाती है। शैक्षिक भ्रमण के जरिए बच्चे किताबों में पढ़ी बातों को अपनी आंखों से देखते और समझते हैं। जिला मुख्यालय जैसे स्थान पर जाकर उन्हें पता चलता है कि प्रशासन और पुलिस व्यवस्था किस तरह काम करती है। यह अनुभव उनकी सामाजिक समझ को मजबूत करता है।
बच्चों में बढ़ेगा आत्मविश्वास
जब बच्चे वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे मिलते हैं, तो उनके मन की झिझक कम होती है। वे अपनी बात रखना सीखते हैं और बड़े पदों पर बैठे लोगों को करीब से देखकर खुद भी आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। ऐसे अवसर बच्चों को यह भरोसा देते हैं कि मेहनत और लगन से वे भी अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।
मोबाइल और सोशल मीडिया पर संतुलन जरूरी
आज के समय में बच्चों का बड़ा हिस्सा मोबाइल और सोशल मीडिया पर बीत रहा है। ऐसे में अधिकारियों की यह सलाह अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी अहम है। पढ़ाई, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों में समय लगाने से बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर होता है।
अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका
बच्चों को सही दिशा देने में परिवार और शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम होती है। भ्रमण में मिली सीख को घर और स्कूल में दोहराया जाए, तो उसका असर लंबे समय तक बना रहता है। बच्चों को नियमित पढ़ाई, अनुशासन और स्वच्छता की आदतों के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है।
रिपोर्ट – अरुण कश्यप । हरिद्वार
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