लोहाघाट (चम्पावत)। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत करने वाली लोहाघाट रामलीला ने इस वर्ष 126वें साल में प्रवेश कर लिया है। प्रथम नवरात्र के पावन अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन और फीता काटकर इसका विधिवत शुभारंभ किया गया। आस्था, संस्कृति और परंपरा के इस संगम को लेकर क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई शुरुआत
चम्पावत जिले के लोहाघाट नगर में श्रीराम सेवा सांस्कृतिक रामलीला कमेटी की ओर से इस ऐतिहासिक आयोजन की शुरुआत हुई। नगरपालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा और नगर के वरिष्ठ नागरिकों ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा फीता काटकर रामलीला का शुभारंभ किया।
126 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रही इस रामलीला के मंच पर कलाकार प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों का जीवंत मंचन करेंगे। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श, सत्य की विजय और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।
बाइट: नगरपालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा।
देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी लोहाघाट रामलीला ने 126वें वर्ष में प्रवेश कर लिया है। प्रथम नवरात्र पर श्रीराम सेवा सांस्कृतिक रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित इस ऐतिहासिक रामलीला का नगरपालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा और नगर के वरिष्ठ नागरिकों ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा फीता काटकर शुभारंभ किया।
इस रामलीला की खास पहचान यह है कि यहां महिला पात्रों की भूमिका महिलाएं ही निभाती हैं। कमेटी अध्यक्ष जीवन सिंह मेहता के निर्देशन में तैयारियां पूरी हैं। प्रतिदिन शाम साढ़े सात बजे कौशल संगीत अकादमी के कलाकार भजन प्रस्तुत करेंगे, जबकि रात आठ बजे से मंचन शुरू होगा।
21 अक्टूबर को भरत मिलाप, सांस्कृतिक संध्या और शोभायात्रा निकाली जाएगी। पहली बार महिलाएं डांडिया नृत्य भी प्रस्तुत करेंगी। 22 अक्टूबर को क्षेत्रीय कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। कमेटी ने क्षेत्रवासियों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है।
महिला पात्रों का अभिनय महिलाएं ही करती हैं
लोहाघाट रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां महिला पात्रों की भूमिका महिलाएं ही निभाती हैं। यह परंपरा आयोजन को अलग पहचान देती है। साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक मंच पर महिलाओं की प्रतिभा और भागीदारी को भी मजबूती देती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है। इससे नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होती है।
रोज शाम भजन, रात आठ बजे से मंचन
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जीवन सिंह मेहता के निर्देशन में आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम के अनुसार प्रतिदिन शाम साढ़े सात बजे कौशल संगीत अकादमी के कलाकार भजनों की प्रस्तुति देंगे। इसके बाद प्रभु श्रीराम की स्तुति होगी और रात आठ बजे से रामलीला का मंचन शुरू होगा।
21 और 22 अक्टूबर के विशेष कार्यक्रम
आयोजन को और खास बनाने के लिए 21 अक्टूबर को भरत मिलाप, सांस्कृतिक संध्या और भगवान श्रीराम की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दिन का कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहने की उम्मीद है।
इस बार पहली बार महिलाओं की ओर से डांडिया नृत्य की प्रस्तुति भी दी जाएगी, जो आयोजन का मुख्य आकर्षण बनेगी। वहीं 22 अक्टूबर को क्षेत्रीय कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे।
सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक
126 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल रामलीला का मंचन नहीं है। यह लोहाघाट की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का भी प्रतीक है। हर वर्ष बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग इस आयोजन से जुड़ते हैं और इसे अपने सामूहिक उत्सव के रूप में मनाते हैं।
क्षेत्रवासियों से अपील
रामलीला कमेटी ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है। कमेटी ने लोगों से इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में भी सहभागी बनने का आग्रह किया है।
रिपोर्ट: मनोज कापड़ी, लोहाघाट (चम्पावत)
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