बलिया के रसड़ा इलाके से जुड़ा यह बलिया डबल मर्डर केस अब पूरी तरह पलट चुका है। शुरुआत में जिसे अनजान बदमाशों की करतूत बताया गया था, जांच में वही घटना घर के मुखिया की खुद रची साजिश निकली।
क्या है पूरा मामला
रसड़ा के मुस्तफाबाद गांव में 17 सितंबर को एक घर से चौंकाने वाली खबर आई — 65 वर्षीय मानती देवी और उनकी 22 वर्षीय बेटी गौरी की जान जा चुकी थी। परिवार के मुखिया, 70 वर्षीय रामचीज गुप्ता ने पुलिस को बताया कि अज्ञात लोगों ने वारदात को अंजाम दिया है। शुरुआती जांच में मामला किसी बाहरी हमले जैसा लग रहा था, मगर पुलिस की पड़ताल आगे बढ़ते ही तस्वीर बदलने लगी।
शक की सुई घूमी घर के मुखिया की ओर
बलिया डबल मर्डर की तह तक जाने के लिए SWAT टीम, सर्विलांस यूनिट और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। सबूतों को जोड़ते हुए जांचकर्ताओं का शक धीरे-धीरे रामचीज गुप्ता की तरफ मुड़ने लगा। पुलिस के अनुसार, उसने ही अपने दो परिचितों को साथ लेकर पूरी साजिश रची थी।
बीमारी और दिव्यांगता बनी वजह?
पुलिस के मुताबिक मानती देवी मानसिक बीमारी से पीड़ित थीं और कई बार असामान्य हालत में गांव में घूमती नजर आती थीं। उनकी बेटी गौरी दृष्टिबाधित थी और मां के घर से बाहर निकलने पर उसे पड़ोसियों से खाना मांगना पड़ता था। जांच में सामने आया कि परिवार की इस स्थिति से समाज में अपनी छवि को लेकर रामचीज परेशान रहता था, और इसी वजह से कथित तौर पर उसने दोनों को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
16 सितंबर की रात की साजिश
पुलिस के अनुसार 16 सितंबर की शाम रामचीज और उसके दो साथियों ने मिलकर धारदार हथियार से वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद घर में मौजूद निशान मिटाने की कोशिश की गई और बेटी का शव खेत में फेंक दिया गया। अगले दिन रामचीज ने पुलिस को सूचना दी और अज्ञात हमलावरों की कहानी गढ़ी — मगर जांच में यह झूठ बेनकाब हो गया।
पुलिस की कार्रवाई
बलिया डबल मर्डर मामले में पुलिस ने रामचीज गुप्ता समेत तीनों आरोपियों को सिधागरघाट के पास से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हथियार और खून से सने कपड़े भी बरामद किए गए हैं। पुलिस अब पूरी साजिश और हर आरोपी की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।
ये भी पढ़ें: