अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश की बालवाटिकाओं में 8 सितंबर को एक अनोखी बालवाटिका साक्षरता दिवस एक्टिविटी आयोजित होने जा रही है। योगी सरकार ने छोटे बच्चों की नींव मजबूत करने के इरादे से पढ़ाई को खेल और मनोरंजन के साथ जोड़ने की नई कोशिश शुरू की है। इस पहल का मकसद है कि बच्चे किताबी बोझ की बजाय कहानियों के जरिए सीखने की दुनिया में कदम रखें।
क्या है पूरी योजना
राज्य के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों, बालवाटिकाओं और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में यह कार्यक्रम एक साथ चलाया जाएगा। तय दिनचर्या के मुताबिक बच्चों के स्वागत और खेल गतिविधि के बाद कहानी सत्र रखा गया है। उम्र के हिसाब से बिग बुक या स्थानीय स्तर की कहानियां चुनी जाएंगी, जिनमें कोई न कोई सीख या नैतिक संदेश जरूर छिपा हो
सिर्फ सुनना नहीं, सोचना और बोलना भी
इस बार बच्चों को केवल श्रोता बनाकर नहीं छोड़ा जाएगा। कहानी के बीच-बीच में उनसे तरह-तरह के सवाल पूछे जाएंगे, ताकि वे अपने शब्दों में जवाब देना सीखें। खुले और बंद, दोनों तरह के प्रश्न पूछे जाएंगे जिससे बच्चों की समझ के साथ-साथ कल्पनाशक्ति भी परखी और निखारी जा सके
कहानी के बाद रंग और कागज से चित्रकारी
कहानी खत्म होने पर गतिविधि यहीं नहीं रुकेगी। बच्चों को कागज और रंग देकर कहानी पर आधारित तस्वीर बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके बाद हर बच्चा अपनी बनाई तस्वीर के बारे में साथियों को बताएगा। बच्चों के इन चित्रों को संभालकर रखने और उन्हें प्रदर्शित करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि उनका हौसला बढ़े।
DIET में अभिभावकों की भी भागीदारी
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में स्थानीय जरूरत के मुताबिक नई गतिविधियां जोड़ी जा सकती हैं। यहां आसपास की बालवाटिकाओं के बच्चों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक और अभिभावक भी शामिल हो सकेंगे। कहानी वाचन के बाद चर्चा और सवाल-जवाब का दौर भी होगा, जिससे परिवार भी बच्चों की सीख में हिस्सेदार बन सकें।
अधिकारियों की राय
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह के अनुसार सरकार सीखने को आनंद और रचनात्मकता से जोड़ने पर काम कर रही है। वहीं महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी का कहना है कि कहानी बच्चों के लिए सोचने और अभिव्यक्ति का सबसे सहज माध्यम है, जो साक्षरता की मजबूत नींव तैयार करेगी।
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