देहरादून। दून बासमती के पुनर्जीवन के प्रयासों का असर अब खेतों में दिखने लगा है। विकासनगर क्षेत्र में लहलहाती फसल ने किसानों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव शाह ने शनिवार को विकासनगर ब्लॉक के कई गांवों में दून बासमती की फसल का स्थलीय निरीक्षण किया और किसानों से संवाद किया।
चार गांवों में फसल का स्थलीय निरीक्षण
सीडीओ अभिनव शाह ने विकासनगर ब्लॉक के जस्सोवाला, ढकरानी, हरबर्टपुर और फतेहपुर ग्रांट गांवों का दौरा किया। उन्होंने खेतों में पहुंचकर दून बासमती की फसल की स्थिति देखी। लहलहाती फसल को देखकर क्षेत्र के किसानों में उम्मीद नजर आई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत कर खेती से जुड़े अनुभव भी जाने।
किसानों ने रखीं अपनी चुनौतियां
संवाद के दौरान किसानों ने खेती से जुड़ी कई समस्याएं सीडीओ के सामने रखीं। किसानों ने जैविक खेती की चुनौतियों, प्रमाणित बीज की कमी, फसल बीमा में देरी और जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रही दिक्कतों की जानकारी दी। किसानों का कहना है कि इन समस्याओं के समाधान से दून बासमती की खेती को और मजबूती मिल सकती है।
बाइट: अभिनव शाह, मुख्य विकास अधिकारी, देहरादून
दून बासमती के पुनर्जीवन के प्रयासों का असर अब खेतों में दिखने लगा है। विकासनगर क्षेत्र में लहलहाती फसल ने किसानों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने शनिवार को विकासनगर ब्लॉक के जस्सोवाला, ढकरानी, हरबर्टपुर और फतेहपुर ग्रांट गांवों में फसल का स्थलीय निरीक्षण किया और किसानों से संवाद किया।
सीडीओ के अनुसार, संवाद के दौरान किसानों ने जैविक खेती की चुनौतियों, प्रमाणित बीज की कमी, फसल बीमा में देरी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याएं बताईं। इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लिया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले साल 65 हेक्टेयर क्षेत्र में दून बासमती की खेती हुई थी, जिसे रीप योजना के तहत खरीदा गया था। इस साल खेती का लक्ष्य बढ़ाकर 75 हेक्टेयर किया गया है।
अभिनव शाह ने कृषि विभाग और रीप के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दून बासमती का उचित मूल्य शीघ्र तय किया जाए। साथ ही किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिए सीड बैंक बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। उनका कहना है कि ऐसे प्रयासों से दून बासमती की पहचान को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पिछले साल 65 हेक्टेयर में हुई थी खेती, इस साल लक्ष्य 75 हेक्टेयर
सीडीओ ने बताया कि पिछले साल 65 हेक्टेयर क्षेत्र में दून बासमती की खेती हुई थी। इस फसल को रीप योजना के तहत खरीदा गया था। इस साल खेती का लक्ष्य बढ़ाकर 75 हेक्टेयर किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि दून बासमती की पहचान और उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास आगे बढ़ रहे हैं।
सीडीओ के निर्देश: उचित मूल्य और सीड बैंक
अभिनव शाह ने कृषि विभाग और रीप के अधिकारियों को दून बासमती का उचित मूल्य शीघ्र तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमाणित बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सीड बैंक बनाने के निर्देश भी दिए। किसानों की प्रमाणित बीज की कमी की शिकायत को देखते हुए इसे अहम कदम माना जा रहा है।
अमूल्य निधि ऑर्गेनिक फार्म का भ्रमण
निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने हरबर्टपुर स्थित अमूल्य निधि ऑर्गेनिक फार्म का भी भ्रमण किया। उन्होंने यहां चल रहे जैविक खेती के प्रयासों की सराहना की। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रयासों को उपयोगी बताया गया।
दून बासमती को मिल सकती है नई पहचान
दून बासमती अपनी खास खुशबू और गुणवत्ता के लिए जानी जाती रही है। किसानों को उम्मीद है कि उचित मूल्य, प्रमाणित बीज और बीमा जैसी सुविधाएं समय पर मिलने से इसकी खेती फिर से बड़े स्तर पर होगी।
रिपोर्टर: आकाश, देहरादून
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