अयोध्या(Ayodhya) में एक लम्बी क़ानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार राम मंदिर(Ram Mandir) का निर्माण हो ही गया। इस निर्माण के साथ ही अब हिन्दू पक्ष कशी में स्थित ज्ञानवापी ढाँचे (Gyanvapi Case) को लेकर काफी आस लगाए बैठा है। करीब 350 साल के लम्बे वि वाद और 3 दशकों से चल रही क़ानूनी लड़ाई पर अब विराम लगने की प्रतीक्षा है। इसी कड़ी में पुरातत्व विभाग ने एक बार फिर से ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण किया है। आपको बता दें की इस सर्वेक्षण के नतीजे चौकाने वाले है। अब देखना ये होगा की ASI की रिपोर्ट्स पर कोर्ट द्वारा क्या कदम लिए जाते है। आइये बताते हैं आपको क्या कहती हैं रिपोर्ट्स।

ASI द्वारा किया गया Gyanvapi परिसर का सर्वेक्षण!
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा तैयार संरचना की ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद की पश्चिमी दीवार पहले से मौजूद हिंदू मंदिर का शेष हिस्सा है। एएसआई रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि यह कहा जा सकता है कि मौजूदा संरचना, यानी मस्जिद के निर्माण से पहले वहां एक हिंदू मंदिर मौजूद था। वाराणसी जिला अदालत ने गत बुधवार को आदेश दिया था कि एएसआई द्वारा किए गए ज्ञानवापी मस्जिद के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। इससे सभी याचिकाकर्ताओं, हिंदू और मुस्लिम दोनों को उस तक पहुंच मिल सके।
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Gyanvapi Case पर क्या कहती है ASI की रिपोर्ट्स!
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में कुल 55 पत्थर की मूर्तियां मिलीं। आपको बता दें की इनमे 15 “शिव लिंग”, “विष्णु” की तीन मूर्तियां, “गणेश” की तीन, “नंदी” की दो मूर्तियां शामिल हैं। एएसआई की रिपोर्ट में कहा गया है की, “कृष्ण” की दो, और “हनुमान” की पांच मूर्तियां मिली हैं। इसके साथ ही खंड 3 के अनुसार, एएसआई सर्वेक्षण के दौरान एक “मकर” पत्थर की मूर्ति, एक “द्वारपाल”, एक “अपस्मार पुरुष”, एक “वोटिव मंदिर”, 14 “टुकड़े”, और सात “विविध” पत्थर की मूर्तियां भी मिलीं।

बताते चले की वाराणसी जिला अदालत द्वारा एएसआई को यह पता लगाने का काम सौंपा गया था कि क्या मस्जिद “एक हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर बनाई गई थी”, ने निष्कर्ष निकाला है कि एक मंदिर “औरंगजेब के शासनकाल के दौरान 17 वीं शताब्दी में नष्ट कर दिया गया प्रतीत होता है” और इसका एक हिस्सा…मौजूदा संरचना में संशोधित और पुन: उपयोग किया गया”।