हैदराबाद में मानव तस्करी से जुड़े 2019 के एक मामले में विशेष एनआईए अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बांग्लादेशी महिलाओं को नौकरी और बेहतर कमाई का भरोसा देकर भारत लाने तथा बाद में उन्हें जबरन देह व्यापार में धकेलने से जुड़े मामले में 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है। इनमें 8 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। फैसला 17 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
2019 में सामने आया था मानव तस्करी का मामला
यह मामला सितंबर 2019 में तेलंगाना पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आया था। पुलिस ने हैदराबाद के जलपल्ली गांव में एक कथित देह व्यापार के अड्डे पर कार्रवाई की थी। इस दौरान तीन बांग्लादेशी महिलाओं को वहां से बचाया गया। इसके अलावा बालापुर के महिमूद कॉलोनी स्थित एक घर से भी एक महिला को रेस्क्यू किया गया था।
शुरुआत में मामला तेलंगाना पुलिस के पहाड़ी शरीफ थाने में दर्ज हुआ था। बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इसकी जांच अपने हाथ में ली और मामले को दोबारा दर्ज कर तस्करी नेटवर्क की कड़ियों की जांच शुरू की।
नौकरी और अच्छी कमाई का दिया गया लालच
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क में शामिल लोगों पर आरोप था कि वे बांग्लादेश की महिलाओं को भारत में अच्छी नौकरी और बेहतर वेतन दिलाने का भरोसा देते थे। इसी लालच में महिलाओं को भारत लाया जाता था। आरोप था कि भारत पहुंचने के बाद उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ देह व्यापार में धकेल दिया जाता था।
NIA की जांच में इस गतिविधि को एक संगठित मानव तस्करी नेटवर्क से जोड़कर देखा गया। एजेंसी ने जांच के दौरान आरोपियों की कथित भूमिका के संबंध में साक्ष्य जुटाए और इसके बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
12 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट
NIA के मुताबिक जांच के बाद 17 अक्टूबर 2020 को 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। इनमें कुछ आरोपी फरार बताए गए थे। मामले में गिरफ्तारियां तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग स्थानों से 2019 और 2020 के दौरान की गई थीं।
मुकदमे के दौरान आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC), Foreigners Act, 1946 और Immoral Traffic (Prevention) Act से जुड़ी विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। अदालत ने सुनवाई के बाद 9 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
उम्रकैद के साथ लगाया गया जुर्माना
अदालत ने सभी नौ दोषियों पर कुल 1.37 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आदेश के मुताबिक, यदि जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो दोषियों को इसके बदले तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में रूहुल अमीन धाली, मोहम्मद यूसुफ खान उर्फ मोहम्मद इमरान, बीथी बेगम उर्फ खदीजा शेख, इमामुल गाजी उर्फ मोहम्मद राणा हुसैन, मोहम्मद अल मामून, सोजिब शेख, सुरेश कुमार दास उर्फ सागर, मोहम्मद अब्दुल्ला मुंशी उर्फ अब्दुल सरकार और मोहम्मद अयूब शेख शामिल हैं।
मानव तस्करी नेटवर्क पर जांच का फोकस
यह मामला केवल एक स्थान पर महिलाओं के शोषण तक सीमित नहीं था। NIA की जांच का केंद्र उन लोगों और नेटवर्क की भूमिका रही, जिनके जरिए महिलाओं को सीमा पार से भारत लाने और आगे पहुंचाने का आरोप था। एजेंसी की कार्रवाई के बाद मामला विशेष अदालत तक पहुंचा और अब दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
हैदराबाद का यह फैसला मानव तस्करी से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों और अदालतों की लंबी कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है। मामले में पीड़ित महिलाओं को नौकरी का भरोसा देकर फंसाने और बाद में उनका शोषण करने के आरोपों की जांच 2019 से चल रही थी।
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