नई दिल्ली। IIT दिल्ली में MSc फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच, प्रशासनिक जवाबदेही और वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे की मांग उठाई है। बढ़ते दबाव के बीच IIT दिल्ली प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय बाहरी समिति गठित करने का ऐलान किया है। हालांकि, डीन और अन्य अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पर फिलहाल संस्थान की ओर से कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है।
IIT दिल्ली में छात्र की मौत के बाद प्रदर्शन
ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद सोमवार को IIT दिल्ली परिसर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र जांच के साथ-साथ उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की, जिनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
छात्रों ने स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस के डीन, एसोसिएट डीन और फिजिक्स विभाग के प्रमुख समेत कई अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि छात्र को हॉस्टल और अकादमिक प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों में परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित
IIT दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी की ओर से बाहरी जांच समिति बनाने की जानकारी दी गई है। समिति की अगुवाई उत्तराखंड के पूर्व DGP और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार करेंगे।
जांच पैनल में AIIMS नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रताप शर्मा के अलावा छात्र प्रतिनिधियों और संस्थान के अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। समिति का उद्देश्य ऋषिकेश की मौत से जुड़े घटनाक्रम और उससे पहले सामने आई परिस्थितियों की जांच करना है।
डीन के इस्तीफे पर अभी फैसला नहीं
छात्रों की प्रमुख मांगों में डीन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का इस्तीफा शामिल है। हालांकि, बाहरी जांच समिति के गठन की घोषणा के बावजूद इस्तीफे की मांग पर प्रशासन ने अभी कोई स्पष्ट फैसला नहीं बताया है।
छात्र संगठनों का कहना है कि केवल जांच समिति बनाना पर्याप्त नहीं है। वे प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने और छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।
परिवार की आर्थिक मदद का भी ऐलान
IIT दिल्ली प्रशासन ने ऋषिकेश के परिवार को आर्थिक सहायता देने की बात भी कही है। संस्थान के अनुसार, मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति और बेनेवोलेंट फंड से सहायता उपलब्ध कराने के साथ छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वैच्छिक योगदान से अलग फंड बनाने की योजना है।
इसके अलावा छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए बाहरी Ombudsperson नियुक्त करने और छात्र-फैकल्टी मेंटर सिस्टम को मजबूत करने की बात कही गई है।
मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठे सवाल
ऋषिकेश की मौत के बाद IIT दिल्ली में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कल्याण व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने संस्थान से काउंसलिंग सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने और छात्र समस्याओं के समाधान के लिए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल बाहरी जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ऋषिकेश की मौत से पहले की परिस्थितियों और संस्थागत व्यवस्थाओं में किसी तरह की लापरवाही की भूमिका थी या नहीं।