मुंबई के बांद्रा इलाके से रंगदारी और धमकी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। Mumbai क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने एक बिल्डर से कथित तौर पर 11 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बिल्डर को जान से मारने और रेप के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे वसूलने की कोशिश की।
पहले मांगे ₹32 करोड़, फिर 11 करोड़ पर हुई डील
पुलिस के अनुसार पूरा मामला बांद्रा वेस्ट के पेरेरा रोड स्थित एक प्रॉपर्टी के पुनर्विकास से जुड़ा है। आरोप है कि शुरुआत में बिल्डर से 32 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। बाद में कथित तौर पर यह रकम घटाकर 11 करोड़ रुपये करने की बात हुई।
इस रकम की पहली किस्त के तौर पर 25 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। जैसे ही आरोपी यह रकम लेने के लिए बांद्रा स्थित डेवलपर के ऑफिस पहुंचे, पुलिस ने पहले से तैयार किए गए ट्रैप के जरिए उन्हें पकड़ लिया।
छोटा राजन गैंग के नाम का इस्तेमाल करने का आरोप
इस मामले में Mumbai पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपियों ने सिर्फ डर पैदा करने के लिए छोटा राजन गैंग का नाम लिया था या वास्तव में उनका किसी अंडरवर्ल्ड नेटवर्क से कोई संबंध है।
FIR में कुल आठ लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें राजविंदर सिंह का नाम भी बताया गया है, जिसका कथित तौर पर चेंबूर में छोटा राजन गैंग से संबंध बताया गया है। हालांकि पुलिस जांच के बाद ही इन कनेक्शनों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।
महिला समेत इन 5 आरोपियों की गिरफ्तारी
क्राइम ब्रांच ने इस कार्रवाई में डैनियल स्टीवन, एथेल स्टीवन, नजीर शेख, अब्दुल्ला खान और रेमी फर्नांडीस को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में तीन आरोपियों को 25 लाख रुपये की कथित पहली किस्त लेने के दौरान पकड़ा गया, जबकि दो अन्य आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया गया।
जांच में रेमी फर्नांडीस की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित रंगदारी की साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
25 लाख के लिए पुलिस ने बिछाया जाल
आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अनोखा ट्रैप तैयार किया। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने एक बैग में 25 लाख रुपये के बजाय नकली करेंसी के बंडल रखे थे। इन बंडलों पर “Children’s Bank of India” लिखा हुआ था। ऊपर और नीचे असली 500 रुपये के नोट लगाए गए थे, जिससे बैग बाहर से असली रकम से भरा हुआ दिखाई दे।
जब आरोपी कथित तौर पर रकम लेने पहुंचे और बैग स्वीकार किया, तभी एंटी एक्सटॉर्शन सेल की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पुरानी और जर्जर इमारत से शुरू हुआ विवाद
जिस प्रॉपर्टी को लेकर विवाद हुआ, वह बांद्रा वेस्ट के पेरेरा रोड पर स्थित करीब 50 साल पुरानी इमारत थी। यह संपत्ति बॉम्बे के आर्चडायसिस की बताई गई है। पुनर्विकास के लिए टेंडर प्रक्रिया के बाद दिलजय प्रॉपर्टीज को सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में चुना गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में BMC ने इस इमारत को C-1 यानी खतरनाक और जर्जर श्रेणी में घोषित किया था। इसके बाद सुरक्षा कारणों से बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई। जून 2026 तक इमारत की स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।
इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत इमारत को गिराया गया। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद प्रॉपर्टी को लेकर विवाद और बढ़ गया।
धमकी और मारपीट की शिकायतें भी हुई थीं
पुलिस के मुताबिक, इमारत गिराए जाने के बाद कुछ लोग लगातार साइट पर पहुंचने लगे। आरोप है कि उनके साथ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुछ लोग भी आते थे और डेवलपर के सुरक्षा कर्मचारियों को धमकाया जाता था।
इस मामले में बांद्रा पुलिस स्टेशन में पहले भी शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2026 में इस संबंध में दो FIR दर्ज की गई थीं।
आरोप है कि बाद में जब डेवलपर ने साइट पर सुरक्षा के लिए घेराबंदी का काम शुरू कराया, तब कुछ लोग वहां पहुंचे और काम रोकने की कोशिश की। इसी दौरान बिल्डर से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की मांग की गई।
पुलिस ने ऐसे पकड़ा पूरा नेटवर्क
लगातार धमकियों के बाद डेवलपर ने मामले की जानकारी मुंबई क्राइम ब्रांच को दी। पुलिस ने शिकायत, रिकॉर्डिंग और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई।
24 अगस्त को कथित तौर पर आरोपियों और डेवलपर के बीच रकम को लेकर बातचीत हुई और 11 करोड़ रुपये में मामला ‘सेटल’ करने की बात कही गई। पहली किस्त 25 लाख रुपये तय हुई थी। इसके बाद 1 सितंबर को आरोपियों के रकम लेने पहुंचने पर पुलिस ने ट्रैप लगाकर कार्रवाई कर दी।
अब अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की जांच
पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 5 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अब Mumbai Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रंगदारी की इस कोशिश के पीछे कितने लोग शामिल हैं और छोटा राजन गैंग का नाम किस मकसद से इस्तेमाल किया गया।
फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले में सामने आए अन्य नामों की भूमिका की भी जांच जारी है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 11 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी की साजिश का नेटवर्क कितना बड़ा था।