नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। शुरुआत में विदेशी बचाव टीमों को नकारने वाली नेपाल सरकार को अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद अपना रुख बदलना पड़ा है। अब नेपाल ने भारत और चीन समेत कई देशों से सीमित तकनीकी मदद मांगी है, जिस पर भारत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राहत सामग्री और टीमें भेज दी हैं।
क्या है पूरा मामला?
नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। शुरुआत में नेपाल सरकार ने साफ कर दिया था कि उसके अपने बचाव कर्मी और सुरक्षाबल इस आपदा से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं, इसलिए विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को देश में आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।
लेकिन इस आपदा में सिर्फ नेपाली नागरिक ही नहीं, बल्कि कई विदेशी नागरिक भी लापता हो गए, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की भी है। जैसे-जैसे लापता विदेशी नागरिकों की चिंता बढ़ती गई, वैसे-वैसे उन देशों की तरफ से नेपाल सरकार पर कूटनीतिक दबाव भी बढ़ता गया। आखिरकार नेपाल सरकार को अपने पुराने फैसले पर यू-टर्न लेना पड़ा और अब उसने कुछ खास तकनीकी क्षेत्रों में सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों को आने की मंजूरी दे दी है।
किन कामों के लिए ली जा रही है विदेशी मदद
नेपाल सरकार ने साफ किया है कि यह मदद पूरी तरह “सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन” के लिए नहीं ली जा रही, बल्कि उन तकनीकी क्षेत्रों के लिए ली जा रही है जहां नेपाल के पास खुद की विशेषज्ञता की कमी है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- लापता और मृत लोगों की पहचान के लिए DNA टेस्टिंग
- घटनास्थलों की फॉरेंसिक जांच
- कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग और बचाव कार्य में सहायता
नेपाल के विदेश मंत्री ने एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी से बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि नेपाल को केवल उन तकनीकी क्षेत्रों में मदद चाहिए जहां उसके पास संसाधनों या दक्षता की कमी है, न कि पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को विदेशी टीमों के हवाले किया जा रहा है।
भारत ने दिखाई तत्परता, तुरंत भेजी मदद
नेपाल के फैसला बदलते ही भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए तेजी से कदम उठाए। भारत की एक तकनीकी टीम मदद के लिए काठमांडू पहुंच चुकी है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना भी नेपाल में राहत और बचाव अभियान में सक्रिय रूप से जुटी हुई है।
भारत की तरफ से दवाइयां, खाने-पीने का सामान और अन्य ज़रूरी राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है। जानकारी के मुताबिक भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान करीब 10 टन जरूरी राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा, ताकि आपदा प्रभावित लोगों तक तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। यह भारत की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत पड़ोसी देशों में किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आता है।
चीन-नेपाल सीमा के पास भी बड़ा नुकसान
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन-नेपाल सीमा के करीब आई अचानक बाढ़ में कई तीर्थयात्री भी फंस गए, जिनमें से दर्जनों अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस इलाके में हुए नुकसान ने भी नेपाल सरकार पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेने का दबाव बढ़ाने में भूमिका निभाई।
आंकड़ों में कितनी बड़ी है यह आपदा
नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने जो तबाही मचाई है, उसका अंदाज़ा नीचे दिए आंकड़ों से लगाया जा सकता है:
- अब तक 600 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है
- करीब 2,500 लोग अभी भी लापता हैं
- इस आपदा में करीब 320 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के करीब 100 अन्य लोग अभी संपर्क से बाहर हैं
- राहत की बात यह है कि तिब्बत में मौजूद लगभग 400 भारतीय नागरिकों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित बताए जा रहे हैं
आगे क्या होगा?
फिलहाल नेपाल में बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। नेपाली सेना, स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ अब सीमित संख्या में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी DNA टेस्टिंग, फॉरेंसिक जांच और तकनीकी सहयोग में मदद करेंगे। भारत की तरफ से लगातार राहत सामग्री और सहयोग भेजा जा रहा है, वहीं लापता भारतीयों का पता लगाने के लिए भारतीय एजेंसियां भी नेपाल प्रशासन के संपर्क में हैं।
आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और राहत कार्यों की रफ्तार यह तय करेगी कि लापता लोगों की तलाश में कितनी सफलता मिलती है।