नेपाल अभी बीते हफ्ते आई भीषण बाढ़ की तबाही से उबर भी नहीं पाया है कि एक नया संकट खड़ा हो गया है। चीन ने नेपाल को आधिकारिक तौर पर चेतावनी दी है कि ल्हेंडे नदी तंत्र के ऊपरी हिस्से में बनी एक अस्थाई झील किसी भी समय टूट सकती है। झील के पानी का रंग लगातार गहरा हो रहा है, जिसे खतरे की बड़ी निशानी माना जा रहा है।
कैसे बनी यह खतरनाक झील?
यह झील कोई पुरानी प्राकृतिक झील नहीं है, बल्कि हाल ही में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद अचानक अस्तित्व में आई है। नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में आई तबाही के दौरान एक ग्लेशियर टूट गया था, जिससे भारी मात्रा में मलबा नीचे की ओर बहकर आया। इस मलबे ने नदी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया और वहां एक अस्थाई प्राकृतिक बांध बन गया। इसी बांध के पीछे धीरे-धीरे पानी जमा होता गया और एक बड़ी झील तैयार हो गई।
यह झील चीन की तरफ बहने वाली चोचेन नदी और नेपाल की तरफ की पुरेपु नदी के संगम के पास स्थित है, यानी इसका असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं, बल्कि सीमा के दोनों तरफ महसूस किया जा सकता है।
चीन ने क्यों जताई चिंता?
चीन के जल संसाधन मंत्रालय की निगरानी में यह बात सामने आई कि झील में पानी लगातार बढ़ रहा है। जानकारी के मुताबिक, एक निश्चित दिन तक इस झील में करीब 25 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। इतनी बड़ी मात्रा में पानी जमा होना और झील के पानी के रंग का लगातार गहरा होना, दोनों ही संकेत इस बात के हैं कि प्राकृतिक बांध पर दबाव बढ़ रहा है और वह कभी भी टूट सकता है।
इस खतरे को भांपते हुए चीन ने नेपाल के विदेश मंत्रालय के साथ यह जानकारी साझा की है। साथ ही चीन ने अपने यहां झील के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
झील टूटने पर कितना बड़ा हो सकता है खतरा?
चीन ने इस खतरे का आकलन करने के लिए एक विस्तृत बाढ़ मॉडल भी तैयार किया है, ताकि यह समझा जा सके कि अगर यह अस्थाई बांध टूटता है तो इसका असर कितना गंभीर होगा। इस मॉडल के मुताबिक:
- झील टूटने की स्थिति में नदी तंत्र में पानी का बहाव अधिकतम 500 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकता है
- चीन के आकलन के अनुसार, भले ही बांध का कोई हिस्सा टूट जाए, फिर भी ज्यादातर पानी नदी के किनारों के भीतर ही रहने की संभावना है
- यानी अचानक जलस्तर बढ़ सकता है, लेकिन बड़े पैमाने पर पानी नदी के बाहर फैलने का खतरा फिलहाल कम आंका गया है
गौरतलब है कि झील का कुछ पानी पहले ही ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदियों में बहना शुरू हो चुका है, जिसे फिलहाल प्रबंधनीय स्थिति माना गया है।
पहले से तबाह नेपाल के लिए नई चुनौती
नेपाल में आई हालिया भीषण बाढ़ पहले ही भारी तबाही मचा चुकी है। इस आपदा में अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत क्षेत्र में भी सात लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है। हजारों लोग बेघर हुए हैं और बचाव अभियान अभी भी युद्धस्तर पर जारी है।
ऐसे नाजुक समय में ल्हेंडे नदी पर बनी यह नई झील प्रशासन के लिए एक अतिरिक्त सिरदर्दी बन गई है। अगर यह प्राकृतिक बांध टूटता है, तो पहले से बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों में एक बार फिर संकट खड़ा हो सकता है, जिससे राहत और बचाव कार्य में और मुश्किलें आ सकती हैं।
आगे क्या करना होगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी हिमनद-जनित झीलें (Glacial Lake Outburst Flood या GLOF की स्थिति) हिमालयी क्षेत्र में अक्सर देखी जाती हैं, खासकर बड़े भूस्खलन या फ्लैश फ्लड की घटनाओं के बाद। चीन और नेपाल, दोनों देशों की एजेंसियां फिलहाल सैटेलाइट और ड्रोन के जरिए झील पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते लोगों को सचेत किया जा सके।
नेपाल सरकार के लिए फिलहाल दोहरी चुनौती है — एक तरफ पहले से चली आ रही बाढ़ की तबाही से निपटना, और दूसरी तरफ इस नई झील से जुड़े खतरे पर नजर रखना।