109 साल पुराना कर्ज, आज भी अनसुलझा दावा
अंग्रेजों की हुकूमत भारत से गए दशकों बीत चुके हैं, देश आजाद हुए भी लंबा समय हो गया, लेकिन मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में रहने वाले रूठिया परिवार का कहना है कि ब्रिटिश सरकार पर उनका एक पुराना कर्ज आज भी बकाया है। परिवार के मुताबिक यह मामला पूरे 109 साल पुराना है और अब तक इसका निपटारा नहीं हो सका है।
दादा ने अंग्रेजी हुकूमत को दिए थे 35 हजार रुपये
सीहोर निवासी विवेक रूठिया और उनके भाई विनय रूठिया ने इस पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक की है। दोनों भाइयों का दावा है कि उनके दादा सेठ जुम्मालाल रूठिया ने अंग्रेजी शासनकाल के दौरान ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये की रकम दी थी। यह लेन-देन साल 1917 में हुआ बताया जा रहा है, यानी आजादी मिलने से भी करीब तीन दशक पहले।
ब्याज सहित रकम वापस लेने की कोशिश शुरू
अब लगभग 109 साल बाद रूठिया परिवार ने इस पुरानी रकम को वापस पाने की कवायद शुरू कर दी है। परिवार ने अपने अधिवक्ता के जरिए ब्रिटिश सरकार से संपर्क साधा और उस दौर में दी गई राशि को मौजूदा ब्याज दर के साथ लौटाने की मांग रखी। परिवार का तर्क है कि इतने लंबे समय में मूल रकम पर जुड़ने वाला ब्याज उसकी असली कीमत को कई गुना बढ़ा चुका होगा।
पोतों ने उठाया दादा के हक का मुद्दा
परिवार के लिए यह मामला सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं, बल्कि अपने पुरखों के हक से जुड़ा मुद्दा भी है। रूठिया बंधुओं का कहना है कि दादा जुम्मालाल रूठिया की यह राशि परिवार की विरासत का हिस्सा है, और इसे वापस पाना उनके लिए एक तरह से पारिवारिक इतिहास को सही साबित करने जैसा भी है। यही वजह है कि सौ साल से ज्यादा पुराना यह दावा अब कानूनी रास्ते से आगे बढ़ाया जा रहा है।
ब्रिटिश सरकार का जवाब- सबूत पेश करें
रूठिया परिवार के दावे पर ब्रिटिश सरकार की ओर से जवाब भी आया है। जवाब में कहा गया है कि इतने पुराने लेन-देन को सही साबित करने के लिए ठोस दस्तावेजी सबूत पेश किए जाएं। इस जवाब को परिवार ने उम्मीद की एक किरण के तौर पर देखा है, क्योंकि उनके मुताबिक ब्रिटिश सरकार ने दावे को पूरी तरह खारिज नहीं किया, बल्कि सबूत मांगकर आगे की प्रक्रिया के लिए रास्ता खुला रखा है।
अब आगे क्या
विवेक रूठिया और विनय रूठिया का कहना है कि वे जल्द ही अपने दादा से जुड़े पुराने दस्तावेज और सबूत जुटाकर ब्रिटिश सरकार के सामने पेश करने की तैयारी में हैं। परिवार को उम्मीद है कि सबूत सामने आने पर यह 109 साल पुराना मामला आखिरकार सुलझ सकता है और उन्हें अपने दादा की दी गई रकम ब्याज सहित वापस मिल सकेगी।