लखनऊ के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर सरकारी धन के दुरुपयोग और परियोजना को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर पलटवार करते हुए भ्रष्टाचार का आरोप मढ़ा है।
200 करोड़ से 864 करोड़ तक कैसे पहुंची लागत?
सीएम योगी का दावा है कि JPNIC की शुरुआती लागत करीब 200 करोड़ रुपये थी, जो बाद में बढ़कर 864 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, फिर भी परियोजना अधूरी रह गई। उनके अनुसार, इसे पूरी तरह तैयार करने में अभी 150 से 200 करोड़ रुपये और खर्च होने का अनुमान है। योगी ने आरोप लगाया कि पिछली सपा सरकार ने एक निजी लिमिटेड कंपनी बनाकर इस सरकारी संपत्ति (होटल, जिम, क्लब आदि) का संचालन अपने परिवार और करीबियों को सौंपने की योजना बनाई थी, ताकि इससे होने वाली कमाई सीधे उनके घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि राज्य में डबल इंजन सरकार आने के बाद इस संपत्ति को वापस लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपा गया।
सोसायटी में किन-किन नामों का हुआ खुलासा?
सपा शासनकाल के दौरान गठित एक विशेष सोसायटी के नियम इस तरह बनाए गए थे कि सत्ता बदलने के बावजूद इसका नियंत्रण यादव परिवार और उनके करीबियों के पास ही बना रहे। इस सोसायटी में अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, राजेंद्र चौधरी, गजेंद्र सिंह, अंजू नारायण, वासिफ हसन और अनुपमा प्रकाश जैसे नाम शामिल बताए गए हैं।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने क्या कहा?
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह परियोजना 2003-07 की सपा सरकार में शुरू हुई थी और 2013 में इसके लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन लागत बढ़कर 850 करोड़ रुपये तक पहुंचने के बावजूद काम सिर्फ 60 प्रतिशत ही पूरा हो सका। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतना पैसा कहां गया और कौन-कौन से ठेकेदार इससे मुनाफा कमाते रहे। पाठक के मुताबिक, परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी एक निजी समिति को दी गई थी, जिसमें अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और वासिफ हसन नाम के व्यक्ति शामिल थे।
अब लीज पर क्यों दी गई परियोजना?
उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार ने इसे खुली प्रतियोगिता और टेंडर प्रक्रिया के जरिए सिर्फ संचालन के लिए लीज पर दिया है, स्वामित्व अब भी राज्य सरकार के पास ही है, और आगे चलकर इसके कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम, स्पोर्ट्स फैसिलिटी और म्यूजियम का संचालन LDA की देखरेख में किया जाएगा।
अखिलेश यादव का पलटवार
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा के इन आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार भ्रष्टाचार का ‘स्वर्ण ठोसीकरण’ कर रही है, और इसकी सच्चाई भी एक दिन जनता के सामने आएगी। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर किया जा रहा दिखावा भी जल्द बेनकाब होगा।