सूरत से ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा धोखाधड़ी मामला सामने आया है। साइबर क्राइम पुलिस ने एक संगठित फर्जी ऑर्डर रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक सेलर के अकाउंट पर अचानक आई भारी बिक्री ने शक पैदा किया। जब कंपनी ने डेटा की गहराई से जांच की, तो पूरा मामला ही अलग निकला और सूरत ई-कॉमर्स फ्रॉड की परतें एक-एक कर खुलती चली गईं।
एक ही डिवाइस और नंबर से हो रहे थे सारे ऑर्डर
साइबर क्राइम पुलिस की तकनीकी जांच में सामने आया कि जिन ऑर्डरों को लेकर शक हुआ था, वे सभी एक ही मोबाइल नंबर, एक ही कस्टमर आईडी, एक ही डिवाइस और एक ही आईपी एड्रेस से किए जा रहे थे। यही पैटर्न पूरे सूरत ई-कॉमर्स फ्रॉड की जांच की सबसे बड़ी कड़ी बना, जिसने पुलिस को असली गिरोह तक पहुंचने में मदद की।
सिर्फ शिकायत तक सीमित नहीं रही जांच
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को केवल एक सेलर अकाउंट तक सीमित नहीं रखा। जांच का दायरा बढ़ाकर इसके पीछे सक्रिय लोगों, इस्तेमाल हुए बैंक खातों, डिजिटल डिवाइसों और अन्य संदिग्ध सेलर आईडी तक पहुंचाया गया, ताकि पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके।
तीन दिन पेमेंट, चौथे दिन कैंसिलेशन का खेल
पुलिस के मुताबिक इस रैकेट में एक तय पैटर्न अपनाया जा रहा था। ऑर्डर का भुगतान मिलने के तीन दिन के भीतर उसे स्वीकार कर लिया जाता था, लेकिन चौथे दिन ऑर्डर को कैंसिल कर दिया जाता था। पुलिस का कहना है कि इसी तरीके से ऑर्डर की संख्या कृत्रिम रूप से बढ़ाकर सेलर प्रोटेक्शन फंड से गलत तरीके से रकम हासिल की जा रही थी।
अब तक सामने आई करीब 42 लाख की धोखाधड़ी
जांच में अब तक सामने आया है कि इस पूरे खेल के जरिए करीब 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है। पुलिस अब इस बात की वित्तीय पड़ताल कर रही है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई, किसे भेजी गई और इसका संबंध किन-किन लोगों से जुड़ा है।
जामताड़ा तक पहुंच सकती है जांच की आंच
फिलहाल पुलिस टेलीग्राम चैट, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सबूतों की मदद से इस नेटवर्क के अन्य साथियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। शुरुआती जांच में जामताड़ा समेत कुछ अन्य राज्यों में इस गिरोह से जुड़े लोगों के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं, जिससे सूरत ई-कॉमर्स फ्रॉड मामले की जांच का दायरा और बड़ा हो सकता है।