राजस्थान के नागौर जिले में एक बड़े नागौर फसल बीमा घोटाला का खुलासा हुआ है, जिसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों से ठगी करने वाले संगठित गिरोह को पकड़ा गया है। पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में पांचौड़ी थाना क्षेत्र से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से तीन लाख रुपये नकद, कूटरचित बीमा फॉर्म, फर्जी प्रमाण-पत्र और वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तरीय SOG ने भी जांच शुरू कर दी है।
कैसे दिया गया धोखाधड़ी को अंजाम
पुलिस के अनुसार गिरोह पहले किसानों के खेत, नाम और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी जुटाता था। इसके बाद फर्जी स्टांप और दस्तावेज तैयार कर बीमा प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया जाता था। पांचौड़ी थाने में गिरोह से जुड़ी कुल चार शिकायतें दर्ज हैं।
फसल बीमा ऐप से बनाई फर्जी पॉलिसी
13 अगस्त को दुसार गांव निवासी राजेश जाट ने शिकायत दी थी कि उनकी पत्नी सुमित्रा के नाम दर्ज खेतों का बीमा फसल बीमा ऐप के जरिए फर्जी तरीके से कराकर 4 लाख 70 हजार 168 रुपये की पॉलिसी बना दी गई। जांच में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान परसराम जाट (29), रविन्द्र जाट (24), तरुण जाट (24) और सुखवीर जाट (27) के रूप में हुई।
SOG DIG ने की समीक्षा बैठक
छह घंटे की पूछताछ के बाद SOG DIG भुवन भूषण यादव नागौर पहुंचे और पुलिस, SOG व कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में कृषि विभाग के जॉइंट डायरेक्टर रवींद्र सिंह और सहायक उद्यान अधिकारी सुशील बैरा भी मौजूद रहे।
एसपी बोले- फर्जी स्टांप से हासिल किए क्लेम
जिला पुलिस अधीक्षक आशाराम चौधरी ने बताया कि एजेंट और दलाल किसानों के नाम पर फर्जी स्टांप और प्रमाण-पत्र तैयार कर फसल बीमा क्लेम हासिल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तकनीकी सत्यापन के बाद ही फर्जीवाड़े की सही तस्वीर सामने आएगी।
बैंक खातों और डिजिटल सबूतों की पड़ताल जारी
प्रशिक्षु आईपीएस जितिन जैन की निगरानी में पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, नेटवर्क लिंक और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। SOG नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है ताकि यह पता चल सके कि कुल कितने किसान इस धोखाधड़ी का शिकार बने और कितनी रकम की हेराफेरी हुई।
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