नई दिल्ली: दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल से जुड़ा साइबर अपराध का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक ने नाबालिग लड़की की फेक अश्लील तस्वीर तैयार कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी और इसी के जरिए करीब 1.2 लाख रुपये ऐंठ लिए। मामले का खुलासा करीब ढाई साल बाद हुआ।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर AI तकनीक का इस्तेमाल कर लड़की की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की और उसे आपत्तिजनक रूप में तैयार किया। इसके बाद वह लड़की को तस्वीर वायरल करने की धमकी देकर लगातार दबाव में रखता रहा।
सोशल मीडिया के जरिए बनाया दबाव
आरोप है कि युवक ने लड़की से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क किया। बातचीत बढ़ने के बाद उसने उसकी तस्वीर हासिल कर AI की मदद से उसका फर्जी अश्लील कंटेंट तैयार किया।
इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर तस्वीर को सोशल मीडिया पर साझा करने की धमकी दी। डर के कारण पीड़िता और उसके परिवार पर दबाव बढ़ता गया और आरोपी ने पैसे की मांग शुरू कर दी।
धमकी देकर वसूले 1.2 लाख रुपये
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी ने अलग-अलग समय पर पीड़िता से करीब 1.2 लाख रुपये की रकम वसूली। ब्लैकमेलिंग का सिलसिला काफी समय तक चलता रहा।
परिवार को मामले की गंभीरता का अंदाजा बाद में हुआ। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने डिजिटल सबूतों और ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
ढाई साल बाद सामने आया मामला
इस घटना का खुलासा करीब ढाई साल बाद हुआ। इतने लंबे समय तक मामला सामने नहीं आने की वजह से पुलिस के सामने डिजिटल साक्ष्यों को जुटाने और पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने की चुनौती भी रही।
जांच एजेंसियां आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट, बातचीत, लेनदेन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी तस्वीरें किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा की गई थीं या नहीं।
AI के दुरुपयोग ने बढ़ाई साइबर अपराध की चिंता
इस घटना ने AI से तैयार किए जा रहे फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट के बढ़ते खतरे को भी सामने रखा है। किसी व्यक्ति की सामान्य तस्वीर में डिजिटल तरीके से बदलाव कर उसे आपत्तिजनक रूप देना और फिर उसके आधार पर ब्लैकमेल करना गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर निजी तस्वीरें साझा करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। खासकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में ऐसी सामग्री को आगे साझा करने के बजाय तुरंत पुलिस या संबंधित साइबर अपराध प्राधिकरण को सूचना देनी चाहिए।
पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।