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Nepal Flood: सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला बाढ़ की तबाही का राज, लिरुंग ग्लेशियर टूटने से मची आफत

TV7BHARAT
Last updated: 2026/08/27 at 7:35 PM
TV7BHARAT
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5 Min Read
Nepal Flood
Nepal Flood: लिरुंग ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़
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नेपाल में आई विनाशकारी Nepal Flood को लेकर शुरुआती जांच में भूकंप और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF जैसी आशंकाएं सामने आई थीं। लेकिन अब सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण से इस प्राकृतिक आपदा की एक अलग तस्वीर सामने आई है। जांच में संकेत मिले हैं कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लिरुंग ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिरा, जिसके बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा घाटी की ओर बढ़ा।

Contents
Nepal Flood की शुरुआत कैसे हुई?सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा ग्लेशियर टूटने का निशानकुछ ही समय में कई गुना चौड़ी हो गई नदीआखिर ग्लेशियर क्यों टूटा?आगे भी बना रह सकता है खतरा

Nepal Flood की शुरुआत कैसे हुई?

26 अगस्त को नेपाल के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में अचानक तेज पानी और मलबे का बहाव शुरू हुआ। शुरुआती घंटों में धरती में कंपन दर्ज किए जाने के कारण इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया। हालांकि, बाद की जांच में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के आंकड़ों की समीक्षा की गई और यह संकेत मिला कि दर्ज कंपन किसी सामान्य भूकंप के कारण नहीं था।

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा और उसके साथ बर्फ, पत्थर तथा मलबा भी घाटी में पहुंच गया। इस पूरी प्रक्रिया ने नदी के प्रवाह को अचानक प्रभावित किया और कुछ ही समय में तेज फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा ग्लेशियर टूटने का निशान

इस घटना की जांच में सैटेलाइट इमेजरी महत्वपूर्ण साबित हुई है। तस्वीरों में ग्लेशियर से नीचे घाटी तक एक नया और स्पष्ट निशान दिखाई दिया है। इससे वैज्ञानिकों को उस जगह की पहचान करने में मदद मिली, जहां से बड़े पैमाने पर बर्फ और मलबा नीचे की ओर आया था।

अन्य विश्लेषणों में भी लैंगटांग लिरुंग क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़े बड़े एवलांच और बर्फ के हिस्से के नीचे गिरने के संकेत मिले हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अचानक आई बाढ़ केवल सामान्य बारिश या नदी में बढ़े पानी का परिणाम नहीं थी।

कुछ ही समय में कई गुना चौड़ी हो गई नदी

Nepal Flood की भयावहता का अंदाजा नदी के अचानक बदले स्वरूप से लगाया जा सकता है। स्याफ्रुबेसी क्षेत्र में नदी किनारे की बस्तियों में भारी मलबा पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, बेट्रावती में नदी का फैलाव करीब 90 मीटर से बढ़कर लगभग 490 मीटर तक पहुंच गया। वहीं बिदुर में भी नदी का दायरा करीब 100 मीटर से बढ़कर 549 मीटर तक दर्ज किया गया।

तेज बहाव के साथ आए पत्थरों, पेड़ों और मलबे ने सड़क, पुल, घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान भी प्रभावित हुआ क्योंकि सामान्य सड़क संपर्क टूट गया।

आखिर ग्लेशियर क्यों टूटा?

वैज्ञानिक अब इस सवाल पर ध्यान दे रहे हैं कि ग्लेशियर का हिस्सा अचानक अस्थिर क्यों हुआ। बढ़ता तापमान, बर्फ का तेजी से पिघलना और ग्लेशियर के भीतर पानी का पहुंचना संभावित कारणों में शामिल हैं। हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन का परिणाम घोषित करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन गर्म होते हिमालय में ग्लेशियर और पर्वतीय ढलानों की अस्थिरता एक गंभीर चिंता बन चुकी है।

ग्लेशियर के अंदर पहुंचा पिघला पानी बर्फ और जमीन के बीच पकड़ को कमजोर कर सकता है। ऐसी परिस्थितियों में ग्लेशियर का कोई हिस्सा अचानक खिसक सकता है। यदि इसके बाद नदी का रास्ता भी मलबे से प्रभावित हो जाए, तो कुछ ही मिनटों में खतरनाक फ्लैश फ्लड पैदा हो सकती है।

आगे भी बना रह सकता है खतरा

विशेषज्ञों की चिंता सिर्फ एक बार आई बाढ़ तक सीमित नहीं है। ऊपरी पहाड़ी इलाकों में जमा मलबा और प्राकृतिक अवरोध भविष्य में पानी के प्रवाह को रोक सकते हैं। यदि ऐसा कोई अस्थायी अवरोध अचानक टूटता है तो नीचे के इलाकों में दोबारा तेज पानी पहुंच सकता है।

नेपाल की यह घटना हिमालयी क्षेत्र में आपदा निगरानी की जरूरत को भी सामने लाती है। ग्लेशियरों की नियमित निगरानी, सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल, नदी के जलस्तर पर नजर और समय रहते चेतावनी जारी करना भविष्य में नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Nepal Flood ने यह भी दिखाया है कि हिमालय में बर्फ, चट्टान, पानी और मौसम की घटनाएं एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हैं। किसी ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली घटना का असर कुछ ही घंटों में दूर बसे नदी किनारे के इलाकों तक पहुंच सकता है। इसलिए नेपाल के साथ-साथ हिमालय से जुड़े भारतीय क्षेत्रों के लिए भी ऐसी घटनाओं की वैज्ञानिक निगरानी बेहद जरूरी हो गई है।

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TAGGED: Flash Flood, Glacier Collapse, Himalayan Flood, Lirung Glacier, Nepal Flood, Nepal Flood News, nepal news
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