नई दिल्ली: दिल्ली में ट्रैफिक चालान के निपटारे से जुड़े नियमों में हुए बदलाव को लेकर जिला अदालतों के वकीलों ने विरोध का ऐलान किया है। दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने 21 सितंबर को न्यायिक कार्य से एक दिन दूर रहने का फैसला किया है। वकीलों का विरोध खास तौर पर मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 167 में किए गए बदलावों को लेकर है।
बार एसोसिएशनों का कहना है कि नए प्रावधानों के तहत ट्रैफिक चालान से जुड़े विवादों के निपटारे में न्यायिक अधिकारियों की भूमिका को बदला जा रहा है। समिति ने चालान के मामलों को न्यायिक मजिस्ट्रेट से हटाकर एसडीएम, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों के पास भेजे जाने पर आपत्ति जताई है।
45 दिन के भीतर चालान को चुनौती देने का प्रावधान
संशोधित व्यवस्था के तहत किसी व्यक्ति को चालान जारी होने के बाद उसे स्वीकार कर जुर्माना भरने या निर्धारित प्रक्रिया के जरिए उसे चुनौती देने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए 45 दिन की समयसीमा निर्धारित की गई है। चालान को चुनौती देते समय संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।
अगर निर्धारित अवधि के भीतर चालान को चुनौती नहीं दी जाती है, तो संशोधित नियमों के अनुसार उसे स्वीकार किया हुआ माना जा सकता है। इसके बाद जुर्माने के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
चालान खारिज होने पर 50 फीसदी जमा करने का मुद्दा
वकीलों की आपत्ति का एक प्रमुख कारण 50 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट का प्रावधान है। बार समिति के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति की ओर से दाखिल चालान संबंधी शिकायत खारिज हो जाती है और वह इसके खिलाफ अदालत का रुख करना चाहता है, तो उसे चालान की राशि का 50 प्रतिशत पहले जमा करना होगा।
बार संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था अदालत में आगे कानूनी चुनौती देने वाले लोगों के लिए आर्थिक बाधा पैदा कर सकती है। वहीं संशोधित व्यवस्था के तहत पहले एक प्रशासनिक स्तर पर शिकायत के निपटारे की प्रक्रिया तय की गई है, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
किन अधिकारियों को मिल सकती है जिम्मेदारी?
नए सिस्टम के तहत राज्य सरकार को चालान से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए अलग-अलग अधिकारियों को नामित करने की अनुमति दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक इनमें फूड एंड सप्लाइज विभाग के अधिकारी, तहसीलदार और जिला परिवहन एवं प्रवर्तन कार्यालयों के अधिकारी शामिल हैं। एसडीएम और एडीएम को निगरानी तथा समन्वय से जुड़ी जिम्मेदारियां दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
बार समिति ने इस व्यवस्था को लेकर दिल्ली सरकार के सामने पहले भी अपनी आपत्तियां रखी थीं। समिति के मुताबिक 27 अगस्त और 7 सितंबर को इस मुद्दे पर प्रतिनिधित्व दिया गया था। बार संगठन का कहना है कि उसे बातचीत के दौरान यह आश्वासन मिला था कि एसडीएम और अन्य विभागीय अधिकारियों की नियुक्ति से पहले केंद्र सरकार से भी चर्चा की जाएगी।
21 सितंबर को जिला अदालतों में विरोध
समन्वय समिति ने 19 सितंबर को हुई बैठक के बाद एक दिन न्यायिक कार्य से अलग रहने का निर्णय लिया। समिति ने वकीलों से 21 सितंबर को सुबह 11:30 बजे अपने-अपने जिला अदालत परिसरों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। वकीलों से उस दिन फिजिकल या वर्चुअल माध्यम से किसी अदालत में पेश नहीं होने को भी कहा गया है।
नई दिल्ली बार एसोसिएशन ने भी पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में काम से पूर्ण विराम का अलग सर्कुलर जारी किया है। वकीलों को सुबह 11:30 बजे गेट नंबर 4 पर एकत्र होने के लिए कहा गया है।
दिल्ली में नई चालान व्यवस्था की तैयारी
दिल्ली में संशोधित चालान व्यवस्था को लागू करने की तैयारी के साथ ट्रैफिक पुलिस के ई-चालान सिस्टम को भी अपग्रेड किया जा रहा है। नई डिजिटल व्यवस्था में चालान जारी होने से लेकर भुगतान, शिकायत और उसके निपटारे तक की जानकारी को एक ही सिस्टम में दर्ज करने की योजना है।
इस पूरी व्यवस्था को लेकर फिलहाल सरकार और बार संगठनों के बीच अलग-अलग मत सामने आए हैं। वकीलों का विरोध मुख्य रूप से न्यायिक प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका और 50 प्रतिशत जमा की शर्त को लेकर है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और बार संगठनों के बीच आगे की बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।
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