नई दिल्ली। दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव का माहौल है। व्यापारिक चुनौतियां बढ़ रही हैं और वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित BRICS 2026 सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में हुए इस शिखर सम्मेलन में करीब दो दर्जन देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, आर्थिक सहयोग और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। भारत के लिए यह सम्मेलन सिर्फ कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं था, बल्कि दुनिया के सामने अपनी प्राथमिकताएं रखने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बना। आइए जानते हैं भारत के लिए चर्चा में रहे पांच प्रमुख फैसले और उनके मायने।
1. आतंकवाद के खिलाफ भारत की आवाज को मिला मंच
BRICS 2026 में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को प्रमुखता मिली। पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र इस संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त और साझा कार्रवाई की मांग करता रहा है।
BRICS जैसे बड़े मंच पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अहम माना जा सकता है। हालांकि, किसी साझा घोषणा में किसी मुद्दे का उल्लेख और उसके आधार पर ठोस कार्रवाई होना अलग-अलग बातें हैं। आगे की कार्रवाई से ही इस सहमति का वास्तविक असर स्पष्ट होगा।
2. चीन के साथ बातचीत से रिश्तों पर नजर
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात भी चर्चा में रही। दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से सीमा विवाद और व्यापारिक मतभेदों के कारण चुनौतीपूर्ण रहे हैं।
ऐसे में शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत को संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। भारत और चीन के बीच संबंधों में स्थिरता आने से व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि, पुराने विवादों का समाधान आसान नहीं है।
3. वैश्विक व्यापार में एकतरफा दबाव का मुद्दा
BRICS देशों के बीच वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। बढ़ते टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों से कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्यात, उद्योग और रोजगार पर वैश्विक व्यापार नीतियों का सीधा असर पड़ता है। BRICS मंच पर विकासशील देशों की आर्थिक चिंताओं को उठाना भारत की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहा।
4. ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने पर जोर
BRICS का विस्तार होने के साथ विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने की कोशिशें भी तेज हुई हैं। सम्मेलन में वैश्विक संस्थाओं में सुधार, आर्थिक सहयोग और विकासशील देशों के हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
भारत लंबे समय से ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता देने की बात करता रहा है। ऐसे में BRICS सम्मेलन भारत को अपनी नेतृत्वकारी भूमिका सामने रखने का अवसर देता है।
5. आर्थिक और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं
BRICS देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास से जुड़े सहयोग को बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया। डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भारत के लिए ऐसे सहयोग का फायदा बाजारों तक पहुंच, निवेश के अवसर और तकनीकी साझेदारी के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि, किसी भी घोषणा का वास्तविक लाभ उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
भारत के लिए BRICS 2026 क्यों अहम?
BRICS 2026 सम्मेलन ने भारत को आतंकवाद, व्यापार और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखने का अवसर दिया। चीन के साथ बातचीत और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना भी भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं से जुड़ा रहा।
कुल मिलाकर, सम्मेलन को भारत की वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक प्रभाव को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अब नजर इस बात पर होगी कि सम्मेलन में बनी सहमति को सदस्य देश आगे किस तरह लागू करते हैं।