उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर एक बार फिर पहाड़ खिसकने की घटना सामने आई है। चिरबासा हेलीपैड के आसपास वाले संवेदनशील इलाके में ऊपर से गिरे बड़े आकार के बोल्डर की चपेट में आकर एक स्थानीय निवासी की मौके पर ही जान चली गई। हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यात्रा मार्ग को दोनों दिशाओं से बंद करने का फैसला लिया।
कैसे हुआ हादसा
यह घटना 13 सितंबर की है। बताया जा रहा है कि चिरबासा हेलीपैड के नजदीक पिछले तीन दिनों से रुक-रुक कर पत्थर और बोल्डर गिर रहे थे, जिस वजह से इस मार्ग से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही पहले से ही बाधित हो रही थी। इसी क्रम में एक और बड़ा बोल्डर पहाड़ी से नीचे आया और उसकी चपेट में स्थानीय व्यक्ति आ गया। मृतक की पहचान पठाली गांव निवासी मोहन तिवारी के रूप में हुई है। घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।
प्रशासन ने तुरंत रोकी यात्रा
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और सुरक्षा बल मौके की ओर रवाना हुए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया कि जब तक इलाके का पूरी तरह निरीक्षण नहीं हो जाता, तब तक यात्रा को स्थगित रखा जाए। सोनप्रयाग की ओर से केदारनाथ जा रहे श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने से रोक दिया गया, वहीं धाम से लौट रहे यात्रियों को भी फिलहाल वहीं ठहरने के निर्देश दिए गए हैं। यानी मार्ग पर दोनों तरफ से आवागमन पूरी तरह ठप है।
चिरबासा इलाका क्यों बना खतरे का केंद्र
चिरबासा हेलीपैड के आसपास का हिस्सा भौगोलिक रूप से नाजुक माना जाता है और बारिश के मौसम में यहां भूस्खलन की घटनाएं आम हो जाती हैं। बीते कुछ दिनों से यहां लगातार पत्थर गिरने की सूचनाएं मिल रही थीं, जिससे प्रशासन पहले ही सतर्क अवस्था में था। ताजा हादसे ने इस खतरे को गंभीरता से लेने पर मजबूर कर दिया है। फिलहाल सुरक्षाकर्मियों को मौके पर तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते रोका जा सके।
आगे क्या होगा फैसला
अब यात्रा को कब दोबारा शुरू किया जाएगा, यह पूरी तरह मौसम की स्थिति और मार्ग के सुरक्षा निरीक्षण पर निर्भर करेगा। संबंधित अधिकारी क्षेत्र का जायजा लेने के बाद ही अगला निर्देश जारी करेंगे। तब तक यात्रियों को धैर्य रखने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। गौरतलब है कि केदारनाथ यात्रा में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले वर्षों के मुकाबले नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन बार-बार हो रहे भूस्खलन ने यात्रा की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
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