गाजियाबाद में एक 35 वर्षीय नर्स से कथित दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने घटना के करीब 20 दिन बाद मुकदमा दर्ज किया है। मामला मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपी उसे कार में बैठाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मोरटा निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नौकरी की तलाश में मुंबई से आई थी महिला
शिकायत के मुताबिक, महिला मूल रूप से मुंबई से संबंधित है और नौकरी की तलाश के दौरान गाजियाबाद में रहने लगी थी। वर्तमान में वह दिल्ली के एक अस्पताल में नर्स के तौर पर काम करती है। पुलिस के अनुसार, महिला ने अपने बयान में घटना से संबंधित परिस्थितियों और आरोपी के बारे में जानकारी दी है।
मामले में सामने आए आरोपों के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब शिकायत में बताए गए घटनाक्रम की अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही है।
कार में ले जाने का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी उसे कार में बैठाकर एक स्थान पर ले गया। इसके बाद उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया। महिला ने पुलिस को बताया कि घटना के बाद उसने मामले की शिकायत करने का प्रयास किया था।
पुलिस के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद मामले को दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच के दौरान घटनास्थल, आरोपी और पीड़िता के बीच संपर्क तथा घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि की जाएगी।
घटना के करीब 20 दिन बाद FIR
इस मामले में FIR घटना के लगभग 20 दिन बाद दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि घटना की रात ही पुलिस को सूचना मिलने की बात सामने आई थी। अब दर्ज शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
देर से FIR दर्ज होने की परिस्थितियों को लेकर भी पुलिस तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जांच में जुटी
मधुबन बापूधाम थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच के तहत पुलिस पीड़िता के बयान, घटनास्थल से संबंधित तथ्यों और अन्य संभावित साक्ष्यों को जुटा रही है। आरोपी से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि मामले में सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। फिलहाल जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना जरूरी
दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में कानून और पत्रकारिता के मानकों के तहत पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। इसलिए खबर में ऐसी कोई जानकारी शामिल नहीं की गई है, जिससे महिला की पहचान सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर हो।
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