भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद अब व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं। दोनों देश एक नए निवेश ढांचे पर विचार कर रहे हैं, जिसकी औपचारिक घोषणा सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है।
क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और चीन व्यापारिक आदान-प्रदान को आसान बनाने और चीनी निवेश को गति देने के मकसद से एक नए निवेश ढांचे पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों का उद्देश्य कूटनीतिक रिश्तों में सुधार के साथ-साथ आपसी व्यापार को फिर से पटरी पर लाना है। यह संभावित ढांचा 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आ सकता है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की भी चर्चा है।
मोदी-जिनपिंग की मुलाकात की संभावना
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस संभावित मुलाकात की जमीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल की हाल की बीजिंग यात्रा के दौरान तैयार की गई बताई जा रही है। अगर यह मुलाकात होती है, तो 2019 के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस दौरान चीन भारत के लिए एक निवेश पैकेज की घोषणा कर सकता है।
निवेश ढांचे में क्या शामिल हो सकता है
अनुमान के मुताबिक इस प्रस्तावित ढांचे में कुछ अहम बिंदु शामिल हो सकते हैं:
- समुद्री मार्गों तक आसान पहुंच वाला एक विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने का प्रस्ताव
- BYD समेत चीनी इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच देने की संभावना
- चीनी फंडिंग के सहारे भारत में एक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग सेक्टर तैयार करना, जिससे तीसरे देशों को निर्यात करना आसान हो सके
शुरुआत में बड़े पैकेज की उम्मीद कम
हालांकि रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि शुरुआती दौर में यह निवेश पैकेज बहुत बड़ा नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि दोनों देश करीब छह साल के गतिरोध के बाद रिश्तों को धीरे-धीरे और सावधानी से सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारत गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी निवेश की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर रहा है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), रक्षा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं पर प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेंगे।
भारत की प्राथमिकताएं क्या हैं
भारत की तरफ से इस बातचीत में मुख्य रूप से दो चीजों पर जोर दिया जा रहा है। पहला, IT क्षेत्र और महत्वपूर्ण कच्चे माल की सुगम उपलब्धता को लेकर चीन से भरोसा हासिल करना, ताकि आपूर्ति मार्ग ज्यादा विश्वसनीय बन सकें। दूसरा, चीन से अधिक निवेश आकर्षित करना और तकनीकी उत्पादों समेत भारत से निर्यात को बढ़ावा देना, ताकि दोनों देशों के बीच मौजूद बड़े व्यापार घाटे को कम किया जा सके।
अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच यह घटनाक्रम
गौरतलब है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आ रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच भी व्यापारिक बातचीत जारी है। इस बीच भारत-चीन के बीच सुधरते रिश्ते वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्थिति ब्रिक्स समिट तक और स्पष्ट हो सकती है।
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