हरियाणा के सोनीपत से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सोनीपत पिटबुल हमला मामले में महज 6 महीने के एक मासूम बच्चे को पालतू पिटबुल कुत्ते ने बुरी तरह घायल कर दिया। यह वारदात सिक्का कॉलोनी में उस वक्त हुई जब बच्चे की बुआ उसे गोद में लेकर गली से गुजर रही थीं।
अचानक हुआ हमला, गली में मची अफरा-तफरी
चश्मदीदों के मुताबिक बच्चे की बुआ आराम से गली से निकल रही थीं, तभी एक काला पिटबुल कुत्ता तेजी से दौड़ता हुआ आया और सीधे बच्चे पर झपट पड़ा। इस अप्रत्याशित हमले से आसपास मौजूद लोग सहम गए और गली में चीख-पुकार मच गई। सोनीपत पिटबुल हमला की यह घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को कुछ समझ पाने का मौका ही नहीं मिला।
पालतू कुत्ते से बढ़ता खतरा
यह घटना एक बार फिर पालतू और आक्रामक नस्ल के कुत्तों को लेकर सुरक्षा सवाल खड़े करती है। पिटबुल जैसी नस्लें ताकतवर मानी जाती हैं और अगर इन्हें सही तरीके से प्रशिक्षित या नियंत्रित न किया जाए, तो यह आसपास के लोगों, खासकर बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। सोनीपत पिटबुल हमला जैसी घटनाएं समाज में पालतू जानवरों को लेकर जिम्मेदारी और सतर्कता की जरूरत को उजागर करती हैं।
स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल
घटना के बाद सिक्का कॉलोनी और आसपास के इलाकों में लोगों के बीच डर का माहौल बन गया है। कई निवासियों ने कहा कि इलाके में पहले भी आवारा और पालतू कुत्तों को लेकर शिकायतें आती रही हैं, लेकिन इस तरह की गंभीर घटना पहली बार सामने आई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में खतरनाक नस्ल के कुत्तों को लेकर सख्त नियम लागू किए जाएं।
आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर हलचल तेज है और लोग प्रशासन से जल्द कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं। सोनीपत पिटबुल हमला की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिहायशी इलाकों में खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने को लेकर कोई ठोस नीति क्यों नहीं बन पाई है। आने वाले दिनों में इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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