नेपाल में आई भीषण जल त्रासदी के 9 दिन बाद भी उम्मीद की एक किरण जिंदा है। हिमालय पर ग्लेशियर टूटने से आई प्रलयकारी बाढ़ ने बस्तियां, इमारतें और बाजार पल भर में तबाह कर दिए थे। इसी तबाही के बीच जन्माष्टमी के पावन दिन त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो मजदूरों को सकुशल बाहर निकाला गया, जिसे लोग “दैवीय चमत्कार” बता रहे हैं।
बाढ़ में अब तक कितनी जानें गईं
26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया था। समाचार एजेंसियों के मुताबिक अब तक इस आपदा में करीब 1280 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। शवों की हालत खराब होने के कारण प्रशासन को सामूहिक अंतिम संस्कार करने पड़ रहे हैं, ताकि किसी महामारी को फैलने से रोका जा सके।
रेस्क्यू टीमों की जुटी पूरी ताकत
नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और भारत सहित कई देशों की बचाव टीमें बीते 9 दिनों से लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से अब तक करीब 12 से 13 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इसके बावजूद लगभग 5000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें बड़ी तादाद विदेशी पर्यटकों की बताई जा रही है।
सुरंग से सुनाई दी जिंदगी की आवाज
हादसे के 9वें दिन जब उम्मीदें धुंधली पड़ने लगी थीं, तभी सुरंग के भीतर से इंसानी आवाज सुनाई दी। सेना और पुलिस की टीमें तुरंत सक्रिय हुईं और करीब 170 मीटर गहराई से दो कर्मचारियों को बाहर निकाला। दोनों पूरी तरह मिट्टी में सने हुए थे। रेस्क्यू के बाद उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट देकर हेलीकॉप्टर से काठमांडू के अस्पताल पहुंचाया गया। बचाए गए लोगों की पहचान मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और सुपरवाइजर कबीर महर्जन के रूप में हुई है। संजय की हालत स्थिर बताई जा रही है जबकि कबीर की हालत नाजुक बनी हुई है।
अंधेरे सुरंग में भक्ति ने दिया हौसला
होश में आने के बाद संजय साह ने बताया कि बाढ़ की चेतावनी मिलते ही उन्होंने साथियों को बाहर भेज दिया, मगर खुद जिम्मेदारी निभाते हुए अंदर ही रुक गए। घुप अंधेरे में उन्होंने हार न मानते हुए लगातार “हरे कृष्ण” मंत्र का जाप किया और आसपास मौजूद 3-4 अन्य लोगों से संपर्क बनाए रखा। उनका मानना है कि सुरंग के भीतर अभी भी कुछ लोग जीवित हो सकते हैं।
परिवारों की आंखों में खुशी के आंसू
कबीर महर्जन की चचेरी बहन ने भावुक होकर बताया कि परिवार ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन खबर मिलते ही घर में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों ने बताया कि पूजा-पाठ के बीच ही यह राहत भरी सूचना मिली, जिसे उन्होंने तुरंत बाकी परिवार को साझा किया।
गौरतलब है कि त्रिशूली सुरंग में अब भी करीब 40 से अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। दो लोगों की सुरक्षित वापसी ने रेस्क्यू टीमों और परिवारों दोनों में नई उम्मीद जगा दी है।