प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें एपिसोड में देश और दुनिया के श्रोताओं से संवाद किया. इस मौके पर उन्होंने कई सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रेरणादायक विषयों पर अपने विचार साझा किए. कार्यक्रम को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला. सुबह से ही आम नागरिक, भाजपा कार्यकर्ता और कई जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में एकत्र होकर ‘मन की बात’ सुनते नजर आए. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने गौतम बुद्ध के जीवन और उनके संदेशों की प्रासंगिकता का उल्लेख किया. साथ ही उन्होंने सुभाष चंद्र बोस की जयंती को भी याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया. प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम हर बार की तरह इस बार भी जनभागीदारी और प्रेरणादायक संदेशों के कारण चर्चा का केंद्र बना रहा.
प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की के 133वें एपिसोड में देश-विदेश के श्रोताओं से संवाद करते हुए कई विषयों पर अपने विचार साझा किए. कार्यक्रम को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला—आम नागरिकों से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं तक ने अपने-अपने क्षेत्रों में बैठकर इसे सुना. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने रण आफ कच्छ की बात करते हुए बताया कि बरसात के बाद यह इलाका जीवंत हो उठता है. हर साल लाखों फ्लेमिंगो पक्षी यहां आते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र गुलाबी रंग में रंग जाता है. इसी वजह से इसे फ्लेमिंगो सिटी. भी कहा जाता है. उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग इन पक्षियों को लाखा जी के बाराती कहते हैं, जो अब पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक बन चुके हैं.
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारे देश में 23 जनवरी से यानी नेताजी सुभाष की जयंती से लेकर 30 जनवरी तक, यानी गांधीजी की पुण्यतिथि तक, ‘गणतंत्र पर्व’ मनाया जाता है. इस पर्व का एक अहम हिस्सा बीटिंग रिट्रीट है. आज मैं आपके साथ बीटिंग रिट्रीट पर चर्चा कर रहा हूँ, क्योंकि इसके पीछे एक खास वजह है. यह समारोह अलग-अलग बैंड्स के जरिए हमारी विविध संगीत परंपराओं को प्रदर्शित करता है. पिछले कुछ सालों में इसमें भारतीय संगीत का समावेश बढ़ा है और देश के लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं. इस साल का ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह बेहद यादगार रहा. वायुसेना, थलसेना, नौसेना और C.A.P.F. के बैंड्स ने बेहतरीन प्रस्तुतियां दी हैं.
प्रधानमंत्री ने गौतम बुद्ध के जीवन और संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के वैश्विक तनावपूर्ण माहौल में उनके विचार और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं. उन्होंने कहा कि शांति की शुरुआत भीतर से होती है और आत्म-विजय सबसे बड़ी जीत है. पीएम मोदी ने दक्षिण अमेरिका के चिले, में चल रही एक पहल का जिक्र किया, जहां द्रुबपोन ओत्ज़र रिनपोचे के मार्गदर्शन में एक संस्था ध्यान और करुणा के संदेश को आगे बढ़ा रही है. कोचीगुआज घाटी में बने स्तूप को उन्होंने शांति का केंद्र बताया. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सौर और पवन ऊर्जा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि देश के भविष्य की सुरक्षा का भी सवाल है. उन्होंने बताया कि गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य पवन ऊर्जा के इस्तेमाल से तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
कार्यक्रम में पीएम मोदी ने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम राष्ट्र-निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है. उन्होंने नागरिकों की उपलब्धियों पर भी खुशी जताई और उन्हें देश की ताकत बताया. बता दें कि, मन की बात का प्रसारण बत्तीस भाषाओं और उनतीस बोलियों में किया जाता है, जिससे यह देश के हर कोने तक पहुंचता है. यही वजह है कि हर महीने इस कार्यक्रम को सुनने के लिए लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है.