उत्तर प्रदेश की पूर्व जिलाधिकारी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी IAS Divya Mittal एक बार फिर चर्चा में हैं। देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल से जुड़ी कई घटनाएं समय-समय पर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बनीं। इनमें जनप्रतिनिधियों के साथ कथित टकराव, प्रशासनिक मामलों के निस्तारण को लेकर उठे सवाल और धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रियता से जुड़ी चर्चाएं शामिल हैं।
दिव्या मित्तल के कार्यकाल से जुड़े मामलों को लेकर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग राय रही है। कुछ मामलों में उन पर प्रशासनिक निर्णयों में देरी के आरोप लगाए गए, जबकि कुछ विवाद सीधे जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच मतभेद से जुड़े रहे। ऐसे में उनके कार्यकाल की प्रमुख घटनाओं को समझना जरूरी है।
IAS Divya Mittal और बरहज विधायक के बीच क्या हुआ था?
देवरिया में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक के दौरान IAS Divya Mittal और बरहज विधानसभा क्षेत्र के विधायक दीपक मिश्र के बीच तीखी बहस हुई थी।
यह घटना 3 जुलाई 2025 को विकास भवन स्थित गांधी सभागार में हुई बैठक के दौरान सामने आई थी। बैठक में देवरिया-करुअना मार्ग के निर्माण में देरी और सेवानिवृत्ति के बाद भी एक शिक्षिका को वेतन भुगतान से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हो रही थी।
इसी दौरान विधायक और जिलाधिकारी के बीच मतभेद बढ़ गए। रिपोर्ट के अनुसार, बहस के बाद बरहज विधायक बैठक से बाहर चले गए। इसके बाद डीएम दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक नियमों और शासनादेश यानी जीओ का हवाला देते हुए जनप्रतिनिधियों की भूमिका और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रखी।
यह घटना सामने आने के बाद जिले की राजनीति में काफी चर्चा हुई और प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठे।
दूसरे जनप्रतिनिधियों ने भी जताई थी नाराजगी
बरहज विधायक के साथ हुए विवाद के बाद मामला केवल एक बैठक तक सीमित नहीं रहा। विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी मामले को सुलझाने की बात कही थी।
इसके अलावा देवरिया के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी और तत्कालीन कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही की प्रतिक्रियाओं के बाद मामला और चर्चा में आया।
विवाद के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच अधिकार क्षेत्र तथा संवाद को लेकर सवाल उठे। हालांकि, इस पूरे मामले में अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें थीं और किसी भी पक्ष के दावे को दूसरे पक्ष की पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
शिक्षक के मामले ने भी खड़े किए सवाल
दिव्या मित्तल के कार्यकाल से जुड़ी चर्चा में तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव से संबंधित मामला भी सामने आया।
रिपोर्ट के अनुसार, एक शिक्षक कृष्णमोहन सिंह ने अपने प्रकरण के निस्तारण में देरी और कथित तौर पर पैसे की मांग किए जाने के आरोप लगाए थे। बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली।
इस घटना के बाद प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सवाल उठे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस घटना में दिव्या मित्तल की व्यक्तिगत संलिप्तता स्थापित नहीं थी। इसलिए इस प्रकरण को उनके खिलाफ सीधे आरोप के रूप में पेश करने के बजाय उस समय उठे प्रशासनिक सवालों के संदर्भ में देखना उचित है।
Fatehpur Case में क्या था मामला?
Fatehpur Case भी देवरिया प्रशासन से जुड़ी चर्चाओं में महत्वपूर्ण रहा। 2 अक्टूबर 2023 को फतेहपुर में प्रेमचंद यादव की हत्या के बाद हिंसा की घटना सामने आई थी, जिसमें कुल सात लोगों की जान गई थी।
इस मामले में जमीन और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े सवाल भी उठे। रिपोर्ट के अनुसार, प्रेमचंद यादव के परिवार की जिस जमीन को लेकर विवाद था, उसकी सरकारी स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
मृतक के परिजनों ने मामले को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका अदालत में खारिज होने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर मामला चर्चा में रहा।
दिव्या मित्तल जब देवरिया की जिलाधिकारी बनीं, उस समय भी यह मामला प्रशासनिक स्तर पर लंबित बताया गया। आरोप लगाया गया कि करीब दो वर्षों तक इस संबंध में निर्णय नहीं लिया गया।
हालांकि, इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी प्रशासनिक फाइल के लंबित रहने का कारण केवल जिलाधिकारी की व्यक्तिगत इच्छा या निर्णय से जोड़ना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में विभागीय प्रक्रिया, न्यायालय से जुड़े मामले और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।
धार्मिक आयोजनों को लेकर भी हुई चर्चा
दिव्या मित्तल के कार्यकाल के दौरान उनकी धार्मिक आयोजनों में मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। प्रशासनिक गलियारों में उनके मंदिरों और धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहने को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
आलोचकों का आरोप था कि जिलाधिकारी के रूप में उनकी प्राथमिकताओं में धार्मिक गतिविधियों को अपेक्षाकृत अधिक महत्व दिखाई देता था। उनका तर्क था कि जिला प्रशासन की जिम्मेदारी विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था और जनसमस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देना है।
दूसरी तरफ, किसी सरकारी अधिकारी का धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बतौर प्रशासनिक अधिकारी शामिल होना अपने आप में प्रशासनिक कर्तव्य की अनदेखी साबित नहीं करता। इसलिए इस विषय में उठे सवालों को आरोप और आलोचना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मंदिरों में नृत्य का मामला भी रहा सुर्खियों में
दिव्या मित्तल से जुड़े चर्चित मामलों में धार्मिक आयोजनों के दौरान उनकी मौजूदगी और मंदिरों में नृत्य करने से जुड़ी तस्वीरें या वीडियो भी चर्चा में रहे।
सोशल मीडिया पर इन गतिविधियों को लेकर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में अधिकारी की सहज भागीदारी माना, जबकि आलोचकों ने प्रशासनिक पद की गरिमा और प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठाए।
यही वजह रही कि देवरिया में उनका कार्यकाल केवल प्रशासनिक फैसलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में भी दिखाई देता रहा।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के रिश्ते क्यों महत्वपूर्ण हैं?
किसी भी जिले में जिलाधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जबकि विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि जनता की ओर से चुने जाते हैं। दोनों के बीच बेहतर समन्वय से विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान में तेजी आ सकती है।
वहीं, अगर किसी बैठक में दोनों पक्षों के बीच सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आते हैं तो उसका राजनीतिक और प्रशासनिक असर दिखाई दे सकता है।
IAS Divya Mittal से जुड़ा बरहज विधायक विवाद इसी वजह से चर्चा में आया था। यह घटना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद तथा समन्वय की भूमिका को सामने लाती है।
दिव्या मित्तल के कार्यकाल को लेकर तस्वीर एकतरफा नहीं
दिव्या मित्तल के देवरिया कार्यकाल से जुड़े विवादों को देखते हुए यह कहना आसान हो सकता है कि उनका पूरा कार्यकाल विवादों से घिरा था, लेकिन किसी अधिकारी के कार्यकाल का मूल्यांकन केवल विवादों के आधार पर करना उचित नहीं होता।
प्रशासनिक अधिकारियों के फैसलों पर राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है। किसी मामले में अधिकारी का निर्णय एक पक्ष को सही लग सकता है, जबकि दूसरा पक्ष उससे असहमत हो सकता है।
इसीलिए IAS Divya Mittal से जुड़े मामलों में आरोप, प्रशासनिक रिकॉर्ड, न्यायालय के फैसले और संबंधित पक्षों के बयान अलग-अलग देखना जरूरी है।
क्यों फिर चर्चा में हैं IAS Divya Mittal?
दिव्या मित्तल से जुड़े पुराने विवादों की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब उनके देवरिया कार्यकाल की घटनाओं को एक बार फिर सामने रखा जा रहा है। विधायक के साथ बैठक में हुआ टकराव, प्रशासनिक मामलों में देरी के आरोप और धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रियता जैसे मुद्दे उनके कार्यकाल की चर्चित घटनाओं में शामिल रहे।
हालांकि, इन घटनाओं में कई आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शामिल हैं। इसलिए किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों, जांच और न्यायिक फैसलों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, IAS Divya Mittal का देवरिया कार्यकाल प्रशासनिक फैसलों के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं के कारण भी सुर्खियों में रहा। आने वाले समय में यदि इन मामलों को लेकर कोई आधिकारिक कार्रवाई या नया तथ्य सामने आता है, तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।