मेरठ में Meerut Slap Incident को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। रविवार को शहर के कमिश्नरी पार्क में बहुजन समाज की ओर से महापंचायत आयोजित की गई। इसमें युवा शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि गौतम समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। महापंचायत में तत्कालीन एसएसपी आईपीएस अविनाश पांडेय समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई।
यह पूरा मामला 8 जुलाई को हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान रवि गौतम के साथ मारपीट की गई और उन्हें थप्पड़ मारे गए। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों और पुलिस पक्ष को आधिकारिक जांच के आधार पर ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए।
Meerut Slap Incident की वजह क्या थी?
Meerut Slap Incident की पृष्ठभूमि 15 मई को अनुसूचित जाति की एक छात्रा के अपहरण और हत्या के मामले से जुड़े विरोध प्रदर्शन से बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्यशैली और मामले में न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
8 जुलाई को बहुजन समाज से जुड़े लोगों ने मेरठ में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि इसी दौरान तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय बंदी वाहन के भीतर पहुंचे और रवि गौतम को थप्पड़ मारे। इस घटना का कथित वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया।
महापंचायत में क्या बोले रवि गौतम?
रविवार को कमिश्नरी पार्क में आयोजित महापंचायत में रवि गौतम ने पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया और संबंधित अधिकारियों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। महापंचायत के मंच से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी गई।
रवि गौतम ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल और अनिश्चितकालीन आंदोलन की बात भी कही।
किन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग?
महापंचायत में तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय के अलावा पुलिस अधीक्षक देहात सौम्या अस्थाना और सौरभ शुक्ला के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई गई।
रवि गौतम ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान जेल भेजे गए आठ लोगों, एफआईआर में नामजद 14 लोगों और नोटिस प्राप्त करने वाले कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामलों को समाप्त करने की मांग भी रखी गई।
इन मांगों को लेकर आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाने का संकेत दिया है।
पुलिस की मौजूदगी में हुई महापंचायत
मेरठ में विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए कमिश्नरी पार्क और उसके आसपास पुलिस की तैनाती की गई। महापंचायत में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण प्रशासन भी सतर्क रहा।
महापंचायत से जुड़े वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी दिखाई दी। वहीं, कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने ड्रोन के जरिए भी इलाके की निगरानी की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि महापंचायत में शामिल होने आ रहे कुछ कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोका गया और हिरासत में लिया गया। इसको लेकर भी मंच से नाराजगी जाहिर की गई।
8 जुलाई की घटना के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
8 जुलाई की घटना के बाद Meerut Slap Incident सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया था। प्रदर्शनकारियों की ओर से घटना के वीडियो को सामने लाकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए।
किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की होती है। वहीं, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और पुलिस कार्रवाई के बीच संतुलन भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से इस घटना को लेकर निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
महापंचायत में कई मांगें रखी गईं। इनमें प्रमुख रूप से तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेना और 15 मई के छात्रा अपहरण-हत्या मामले में न्याय की मांग शामिल रही।
रवि गौतम ने कहा कि जब तक मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी भी दी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल Meerut Slap Incident को लेकर कार्रवाई कराना नहीं है, बल्कि छात्रा के मामले में भी न्याय सुनिश्चित कराना है।
आगे क्या हो सकता है?
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। महापंचायत के बाद आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं। यदि प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना है।
दूसरी ओर, पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 8 जुलाई को वास्तव में क्या हुआ था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या रही।
फिलहाल Meerut Slap Incident मेरठ में एक बार फिर चर्चा का प्रमुख मुद्दा बन गया है। महापंचायत के जरिए आंदोलनकारियों ने अपनी मांगें प्रशासन के सामने रख दी हैं और अब आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।