नागपुर के मंच से निकले शब्दों ने बदल दी चर्चा की दिशा
केंद्रीय कैबिनेट के फेरबदल और मंत्रियों के विभाग बदलने की अटकलों के बीच अचानक एक नाम सुर्खियों में आ गया — केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी। नागपुर में आयोजित ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ कार्यक्रम में गडकरी के मुंह से निकले कुछ शब्दों ने राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है। नितिन गडकरी संन्यास को लेकर लगाई जा रही अटकलों को उस वक्त और हवा मिल गई, जब उन्होंने खुद कहा कि अब जिम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंप दी जानी चाहिए, क्योंकि वे पहले जितना काम नहीं कर पा रहे।
दिल्ली-महाराष्ट्र की सियासत में मचा हलचल
गौर करने वाली बात यह है कि यह बयान बिल्कुल उसी वक्त आया है, जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। ऐसे में गडकरी के इस बयान ने कयासों को और गहरा कर दिया है। हालांकि, गडकरी ने बात को ज्यादा तूल न देते हुए तुरंत विषय बदल दिया और विकास कार्यों पर बोलना शुरू कर दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में विकास का दायरा और फैलेगा, और उनका सपना है कि महाराष्ट्र का कोई भी आदिवासी गांव बिजली से वंचित न रहे।
बीजेपी में हुए बड़े फेरबदल के बाद आया बयान, समय अहम
दिलचस्प यह भी है कि यह बयान बीजेपी संगठन में हुए एक बड़े बदलाव के ठीक बाद सामने आया है। पिछले हफ्ते ही पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की 65 सदस्यीय नई टीम घोषित हुई, जिसमें 51 चेहरे बिल्कुल नए हैं। इसे 2015 में अमित शाह के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी का अब तक का सबसे बड़ा संगठनात्मक बदलाव माना जा रहा है। ऐसे माहौल में गडकरी का यह बयान महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि आगे और बड़े फेरबदल का संकेत माना जा रहा है।
“न हाथी है, न घोड़ा है” — गडकरी के अंदाज में जिंदगी का फलसफा
अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में गडकरी ने यह भी साझा किया कि कोविड के बाद उनकी जीवनशैली किस तरह पूरी तरह बदल गई। उन्होंने बताया कि पहले पार्टी का काम करते हुए वे समोसे खा लेते थे और कहीं भी सो जाते थे, लेकिन अब वे अनुशासित हो गए हैं और रोजाना योग करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सेहत ठीक न हो तो सत्ता और पद बेमानी हैं। भावुक अंदाज में उन्होंने शेर भी सुनाया — “सजन रे झूठ मत बोलो, न हाथी है न घोड़ा है… जिंदगी अनमोल है।”