महाराष्ट्र के नासिक में स्थित TCS के BPO केंद्र में महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप सामने आने के बाद देश में बवाल मच गया था. वहीं इस बीच खबर सामने आई है कि, इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की तरफ से जारी हेल्पलाइन नंबर पर 20 से ज्यादा शिकायतें मिली है, लेकिन पुलिस के सामने एक सबसे बड़ी चुनौती सामने आ खड़ी हुई है. दरअसल, पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शिकायतकर्ता औपचारिक तौर पर आगे आकर एफआईआर दर्ज कराने को तैयार नहीं हैं. यही कारण है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई की रफ्तार धीमी हो गई है.
TCS ने उठाया बड़ा कदम
पुलिस की मानें तो हेल्पलाइन पर आई कई शिकायतें धार्मिक भावनाएं आहत होने और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से जुड़ी हैं. इन शिकायतों को कानूनी रूप देने के लिए पीड़ितों का सामने आना जरूरी है, जो फिलहाल नहीं हो पा रहा है. माना जा रहा है कि, सामाजिक दबाव, करियर पर असर और पहचान उजागर होने का डर के कारण वे सामने नहीं आना चाहते. वहीं इस बीच नासिक धर्मांतरण केस में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS ने बड़ा कदम उठाया है. कंपनी के शीर्ष अधिकारियों ने इस मामले की जांच के लिए बाहरी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए आंतरिक प्रक्रिया शुरू कर दी है.
TCS की तरफ से कहा गया है कि निदा खान उसकी नासिक यूनिट में HR मैनेजर नहीं थी. TCS के MD के. कृतिवासन ने एक बयान में कहा कि, इस मामले की जांच प्रेसिडेंट और COO आरती सुब्रमणियन के नेतृत्व में चल रही है. इसके लिए डेलॉयट और प्रमुख लॉ फर्म ट्राइलीगल की विशेषज्ञ टीमों को जोड़ा गया है. कंपनी ने एक निगरानी समिति का भी गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता केकी एम. मिस्त्री कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि, आंतरिक जांच की रिपोर्ट इसी समिति के सामने रखे जाएंगे, जिसे सुझाव पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
मामले को लेकर उन्होंने कहा कि, निदा खान न तो HR मैनेजर थी और न ही कंपनी की नासिक यूनिट में लोगों की भर्ती करती थी. उसने प्रोसेस एसोसिएट का काम किया था. निदा खान के पास कोई नेतृत्व की भूमिका नहीं थी. कृतिवासन ने कहा, हमारी नासिक यूनिट लगातार काम कर रही है और ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. यूनिट के बंद होने की खबरें पूरी तरह गलत हैं. वहीं आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि, शुरुआती समीक्षा में इस तरह की कोई बात सामने नहीं आई है.