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State

रीलबाज डीएम सविन बंसल! फोन जनता के लिए बंद, कैमरा प्रचार के लिए चालू?

News Desk
Last updated: 2025/12/24 at 7:30 AM
News Desk
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5 Min Read
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जिले की सर्वोच्च प्रशासनिक कुर्सी पर बैठे डीएम सविन बंसल लगातार विवादों के घेरे में हैं। आरोप अब महज़ नियम-कानून तोड़ने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह सवाल खुलकर उठने लगे हैं कि क्या डीएम न शासन को गंभीरता से ले रहे हैं और न ही मंत्रियों की फटकार को?

प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि डीएम सविन बंसल का फोकस जमीनी प्रशासन से ज़्यादा कैमरे, रील और अख़बारों की सुर्खियों पर टिक गया है।

मंत्री की फटकार भी बेअसर!

सत्रों के मुताबिक,एक नहीं, कई मामलों में स्वयं मंत्री को डीएम सविन बंसल को कड़ी फटकार लगानी पड़ी,लेकिन इसके बावजूद न तो कार्यशैली में सुधार दिखा और न ही किसी तरह की जवाबदेही तय हुई।

सवाल सीधा है—जब मंत्री की फटकार का भी असर नहीं, तो आम जनता की सुनवाई कौन करेगा?

फोन नहीं उठाते डीएम साहब!

डीएम सविन बंसल पर गंभीर आरोप हैं कि— वे आम जनता के फोन नहीं उठाते,जनप्रतिनिधियों और कई वरिष्ठ अधिकारियों के कॉल भी अनसुने रहते हैं।

आपदा, कानून व्यवस्था या जनहित से जुड़े मामलों में जिलाधिकारी का उपलब्ध न होना सीधी प्रशासनिक लापरवाही नहीं तो और क्या है?सूत्रों का दावा है—डीएम साहब ज़मीनी हकीकत में नहीं, सिर्फ कैमरे के सामने उपलब्ध रहते हैं।

काम कम, अख़बार ज़्यादा!

आरोप है कि डीएम का पूरा ध्यान

काम करने से ज़्यादा, कवरेज बनाने पर है।सरकारी काम → डीएम का नाम,पूरी टीम की मेहनत → डीएम की फोटो,समस्या का समाधान → डीएम की रील,प्रशासनिक जानकार साफ कहते हैं— “जिला प्रशासन अब प्रचार एजेंसी जैसा चलाया जा रहा है।”

वन-मैन शो और सत्ता का अहंकार?

आरोप है कि जिला प्रशासन

वन-मैन शो में तब्दील हो चुका है।

जहाँ पूरी मशीनरी काम करती है, वहाँ श्रेय सिर्फ एक चेहरे को मिलता है।

अंदरखाने चर्चा है कि कई अधिकारी असंतुष्ट हैं, लेकिन कैमरा-केंद्रित प्रशासन के खिलाफ बोलने से डरते हैं।

होमगार्ड का ड्रेस बदलवाया—किस आदेश से?

सबसे हैरान करने वाला मामला यह है कि—डीएम सविन बंसल ने होमगार्ड जवानों का ड्रेस तक बदलवा दिया।सवालों की कतार खड़ी है— क्या ड्रेस बदलने का अधिकार डीएम को है? क्या यह फैसला शासन की अनुमति से लिया गया? या यह सिर्फ व्यक्तिगत शौक और VIP दिखावे का हिस्सा है? प्रशासनिक जानकार इसे नियमों से परे जाकर की गई मनमानी बता रहे हैं।

डीएम कैम्प कार्यालय में ‘अजब खेल’

जब मीडिया डीएम के कैम्प कार्यालय पहुँची तो पता चला— डीएम साहब मौजूद ही नहीं थे।वहाँ मौजूद एक आमीन, जो खुद को डीएम का पीए बता रहे थे,नाम—गिरीश पाण्डेय,

उन्होंने कहा कि “डीएम अपने मुख्य कार्यालय में मिलते हैं।”लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता। SDM अपने दफ्तर छोड़, आमीन के साथ कैम्प कार्यालय में क्यों? सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि—SDM हरी गिरी अपने कार्यालय को छोड़कर डीएम कैम्प कार्यालय में मौजूद थे,वह भी डीएम की गैरमौजूदगी में,

और तथाकथित पीए (आमीन) गिरीश पाण्डेय के साथ बातचीत करते पाए गए।

अब सवाल उठ रहे हैं— SDM अपने दफ्तर छोड़कर कैम्प कार्यालय में क्या कर रहे थे? डीएम की अनुपस्थिति में आमीन के साथ बैठक किस अधिकार में?क्या प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह उलट दिया गया है? यह पूरा घटनाक्रम अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा और संदेह का विषय बना हुआ है।

शासन से सीधे और तीखे सवाल

अब सवाल सिर्फ डीएम सविन बंसल पर नहीं, बल्कि शासन पर भी हैं—मंत्री की फटकार के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

होमगार्ड ड्रेस और कैम्प कार्यालय की मनमानी पर चुप्पी क्यों?क्या अख़बारों में चमकती छवि, हर सवाल को ढक देती है?यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई,तो यह मामला प्रशासनिक अनुशासन के पतन की मिसाल बन जाएगा।अब देखना यह है कि— शासन सच में कार्रवाई करता है

या “रीलबाज अफसरशाही” को खुली छूट देता है। हालांकि इस पुरे मामले में जिलाधिकारी के बयान लेने के लिए उनके कैम्प कार्यालय सहित उनके ऑफिस संवादाता गए लेकिन अभी उनका इन आरोपों को लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है जैसे ही उनका बयान आएगा उनका पछ भी प्रकाशित किया जायेगा… पढ़ते रहिये रोज एक नया खुलासा

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