बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य के छोटे और सीमांत किसानों की आमदनी बढ़ाने को लेकर विस्तार से अपनी योजना साझा की है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती पर निर्भर रहकर किसानों की कमाई तेजी से नहीं बढ़ाई जा सकती, इसलिए सरकार वैकल्पिक कृषि गतिविधियों पर जोर दे रही है।
छोटे किसानों की सबसे बड़ी चुनौती
मंत्री के मुताबिक बिहार की करीब 76 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है, जिसमें से लगभग 96 फीसदी किसान छोटी और सीमांत जोत वाले हैं। उन्होंने बताया कि इतनी छोटी जोत में सिर्फ अनाज उगाकर आय में बड़ा बदलाव लाना मुश्किल है। इसी वजह से सरकार अब हॉर्टिकल्चर, मशरूम की खेती और इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को बढ़ावा दे रही है, ताकि किसानों को खेती के साथ-साथ कमाई के अतिरिक्त जरिए मिल सकें।
हर जिले में प्रशिक्षण पर फोकस
विजय सिन्हा ने कहा कि हर जिले में युवाओं और किसानों को जोड़कर उन्हें नई कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों को भी खेती से जोड़ने की कोशिश हो रही है, जिससे उत्पाद की सीधी बिक्री की बजाय उसकी वैल्यू बढ़ाकर किसानों को ज्यादा मुनाफा मिल सके।
फार्मर आईडी अभियान में बड़ी प्रगति
किसानों की सही पहचान के लिए चलाए जा रहे एग्री स्टैक अभियान का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि उनके कार्यकाल में करीब 48 लाख फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। लक्ष्य सवा दो करोड़ किसानों तक पहुंचने का है। उनका कहना है कि इससे खाद, बीज और सरकारी अनुदान जैसी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचेगा और फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम होगी।
कृषि बजट कम होने पर सफाई
राज्य के कृषि बजट पर उठे सवाल पर मंत्री ने माना कि बिहार का आवंटन दूसरे राज्यों के औसत से कम है। उन्होंने इसकी वजह चुनावी माहौल, सत्ता परिवर्तन और सूखे जैसी स्थितियों को बताया, जिनका असर योजनाओं की रफ्तार पर पड़ता है।
जमीनी विवाद सुलझाना जरूरी
मंत्री ने यह भी कहा कि किसानों के मन में भरोसा बढ़ाने के लिए जमीन से जुड़े विवादों का समाधान बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व विभाग में रहते हुए अवैध खनन पर की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया, जिससे सरकार का राजस्व करीब दोगुना बढ़ा।
कुल मिलाकर, कृषि मंत्री का साफ संदेश है कि बिहार में किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के तरीकों में बदलाव और नई तकनीकों को अपनाना अब जरूरी हो गया है।
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