पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने इस बार एक अलग ही तस्वीर पेश की. 152 विधानसभा सीटों के 44,376 बूथों पर मतदान हुआ और मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे रिकॉर्ड स्तर की वोटिंग दर्ज की गई. आमतौर पर पश्चिम बंगाल के चुनाव हिंसा, झड़प, बूथ कैप्चरिंग और बमबाजी जैसी घटनाओं के लिए चर्चा में रहते हैं. लेकिन इस बार हालात काफी हद तक बदले हुए नजर आए. मुर्शिदाबाद, दक्षिण दिनाजपुर और आसनसोल के कुछ इलाकों से मामूली झड़पों की खबरें जरूर आईं, लेकिन कुल मिलाकर मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही.
राज्य के चुनावी इतिहास में पहली बार
इस शांत माहौल का सबसे बड़ा असर यह रहा कि राज्य के चुनावी इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी भी बूथ पर दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ी… यह एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है. भारतीय निर्वाचन आयोग ने भी इसकी पुष्टि की है. आयोग के मुताबिक फॉर्म 17ए और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद किसी भी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई. सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु में भी विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराए गए। चुनाव आयोग का कहना है कि दोनों राज्यों में मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और सुचारु रूप से पूरी हुई, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है.