2023 Elections: 2023 के बेहद महत्वपूर्ण पांच राज्यों के चुनावों के परिणाम आ चुके हैं। ये पांच राज्य रहे राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम। इन पांच राज्यों में से भाजपा तीन राज्यों पर अपना परचम लहरा चुकी है। राजस्थान,मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी अपनी सरकार बना रही है। हालाँकि अभी तक इन तीन राज्यों में मुख्यमंत्री पद को लेकर संशय बना हुआ है।
तीन राज्यों में प्रचंड बहुमत, शपथ ग्रहण कब?
विधानसभा चुनावों के जनादेश प्रमुख तौर पर भाजपा के नाम ही रहे। पार्टी ने उत्तर भारत के दो सबसे बड़े और प्रमुख राज्यों,मध्यप्रदेश और राजस्थान में जनादेश हासिल किया है। मप्र में तो 160 से अधिक सीट जीत कर भाजपा को ‘प्रचंड बहुमत’ मिला है। जबकि राजस्थान में 110 से अधिक सीटों का स्पष्ट बहुमत कमतर नहीं है। इसे भाजपा के पक्ष में सत्ता की लहर माना जा सकता है, क्योंकि ये जनादेश अनपेक्षित और अप्रत्याशित हैं। यह जनादेश प्रधानमंत्री मोदी, ‘कमल’ और पार्टी काडर के नाम भी रहा, क्योंकि दोनों ही राज्यों में भाजपा ने ‘मुख्यमंत्री का चेहरा’ पेश नहीं किया था।

2023 Elections: राजस्थान में कायम रहा राज का रिवाज़!
राजस्थान में सत्ता का रिवाज नहीं बदला जा सका और कांग्रेस की ‘गारंटियां’ भी जनता ने खारिज कर दीं। खासकर 50 लाख रुपए की ‘चिरंजीवी’ स्वास्थ्य योजना पर जनता ने भरोसा नहीं किया, क्योंकि राज्य का बजट ही बेहद कम है। तो 8 करोड़ राजस्थान वासियों को मुफ्त इलाज की गारंटी कैसे संभव थी? इसकी तुलना में ‘प्रधानमंत्री की गारंटी’ पर सभी राज्यों की जनता ने भरोसा किया। हालांकि ये तमाम गारंटियां ‘मुफ्तखोरी’ की श्रेणी में ही आती हैं। बौद्धिक विशेषज्ञों की एक जमात ‘मुफ्त की रेवडिय़ों’ को भी उचित मानती है। उसकी दलील है कि सरकार का बुनियादी दायित्व ‘कल्याणकारी योजना’ का है और गरीब आदमी की पहली अपेक्षा सरकार से ही होती है।
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— TV7 Bharat (@Tv7Bharat) December 7, 2023
राजस्थान में ‘सांप्रदायिक रक्तपात’ और ‘सर तन से जुदा..’ सरीखे मुद्दों ने भाजपा के पक्ष में धु्रवीकरण को गति दी और तुष्टिकरण के खिलाफ वोट पड़े। नतीजतन मेवाड़, मारवाड़, जयपुर आदि क्षेत्रों में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की। छत्तीसगढ़ का जनादेश सबसे ज्यादा चौंकाने वाला रहा। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने माना है कि इतने व्यापक ‘अंडर करंट’ का एहसास भाजपा को भी नहीं था। बहरहाल छत्तीसगढ़ में सत्ता-परिवर्तन हो रहा है और भाजपा की सरकार बनना लगभग तय है। यह लिखने तक मुख्यमंत्री बघेल और उनके अधिकतर मंत्री चुनाव हार रहे थे। भाजपा को 50 से अधिक सीटें मिल रही हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 46 है। 2018 के जनादेश की तुलना में कांग्रेस ‘आधी’ से भी कम हो गई है। यह बेहद गंभीर पराजय है। जनता के इस मूड को कोई भी ‘एग्जिट पोल’ और विश्लेषण भांप नहीं पाया।

2023 Elections: छत्तीसगढ़ में भी हुआ तख़्तापलट!
गौरतलब है की देश में सबसे ज्यादा आदिवासी छत्तीसगढ़ में रहते हैं और मप्र में इनकी 21 फीसदी आबादी है। दोनों ही राज्यों में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल की है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के जनादेश इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि वहां लोकसभा की क्रमश: 29 और 25 सीटें हैं। जनादेश से स्पष्ट है कि 2024 के आम चुनाव की लहर भाजपा के पक्ष में बह रही है। मप्र में बीते 18 साल से भाजपा सत्तारूढ़ है। उसके बावजूद दो-तिहाई बहुमत हासिल हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 60,000 से अधिक वोट से आगे थे। जनादेश से दो निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट हैं। एक तो सत्ता-विरोधी लहर नहीं थी। दूसरे, जनता भाजपा सरकार की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर आश्वस्त है। राजस्थान, मप्र और छत्तीसगढ़ में करीब 50 फीसदी महिलाओं ने भाजपा को वोट दिया। कमोबेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की 1.31 करोड़ ‘लाडली बहनों’ ने ऐसा जनादेश देकर स्पष्ट कर दिया है कि अब जनाधार किस दिशा में काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के जरिए जो ‘लाभार्थी समूह’ तैयार किया है, वह भी पूरी तरह भाजपा के पक्ष में वोट कर रहा है।
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तेलंगाना में पहली बार कांग्रेस सरकार!
बहरहाल कांग्रेस के लिए एकमात्र राजनीतिक सफलता यह रही है कि तेलंगाना में उसकी सरकार बन रही है। वहां चंद्रशेखर राव और उनकी पार्टी ‘बीआरएस’ 10 साल की सत्ता के बाद विदाई लेंगे। जनादेश वहां के मुसलमानों के नाम भी रहा, जिनके करीब 83 फीसदी मतदाताओं ने कांग्रेस को ही वोट दिए। आपको बता दें की कांग्रेस पहली बार तेलंगाना में सरकार बना रही है। कांटे की टक्कर वाले चुनाव में, कांग्रेस ने 64 सीटें जीतकर भारत राष्ट्र समिति (BRS) को हरा दिया और सत्तारूढ़ पार्टी को 39 सीटों पर छोड़ दिया। इसके साथ ही अब तेलंगाना कांग्रेस के पहले मुख्यमंत्री हैं रेवंत रेड्डी।
-Special Report by Sanjeev Singh