सुप्रीम कोर्ट ने Article 370 पर केंद्र सरकार के फैसले को सही करार दिया है। शीर्ष न्यायालय ने सोमवार को अनुच्छेद 370 को हटाने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को आगामी 30 सितंबर, 2024 तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।
चीफ जस्टिस की बेंच में लिया गया फैसला!
CJI चंद्रचूड़ की अगुवाई में में हो रही सुनवाई में बेंच ने कहा कि उद्घोषणा के तहत किसी राज्य की ओर से केंद्र द्वारा लिए गए हर फैसले को कानूनी चुनौती नहीं दी जा सकती और इससे राज्य का प्रशासन ठप हो जाएगा। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ‘अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था। महाराजा की उद्घोषणा में कहा गया था कि भारत का संविधान खत्म हो जाएगा। इसके साथ, विलय पत्र का पैरा अस्तित्व समाप्त हो जाता है… अनुच्छेद 370 राज्य में युद्ध की स्थिति के कारण एक अंतरिम व्यवस्था थी।
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— TV7 Bharat (@Tv7Bharat) December 11, 2023
Article 370 पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने और न्यायमूर्ति गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत के लिए फैसला लिखते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था और राष्ट्रपति के पास इसे रद्द करने की शक्ति है। बता दें की शीर्ष न्यायालय तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को खत्म करने और इसे लद्दाख सहित केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के विधायी और कार्यकारी आदेशों की एक श्रृंखला को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। तब से, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था, इंटरनेट कनेक्टिविटी पर रोक लगा दी थी और स्थानीय राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा की याचिकाकर्ताओं का यह तर्क कि केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य में अपरिवर्तनीय परिणाम वाली कार्रवाई नहीं कर सकती, स्वीकार्य नहीं है।
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गौरतलब है की जम्मू-कश्मीर ने अगस्त 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत मिल रहा अपना विशेष दर्जा खो दिया था। इसके कुछ ही महीनों बाद भाजपा ने भारी बहुमत से लोकसभा चुनाव जीता था। इसी के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक प्रमुख चुनावी वादा पूरा किया था। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में देखा जा सकता है।