जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(JNU) भारत की सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है। सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशो से भी विद्यार्थी यहाँ पढ़ने आते हैं।विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति भी काफी सक्रीय है। लेकिन कुछ सालों से कैंपस में बढ़ती राजनितिक सक्रियता ने संवैधानिक माहौल और अनुसाशन में सेंध लगाने का काम किया है। जिस वजह से अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने माहौल ख़राब ना होने के लिए बड़ा फैसला लिया है।
धरना-प्रदर्शन करना पड़ेगा भारी!
बीते कुछ वर्षो से जवाहरलाल नेहरू विश्विद्यालय काफी चर्चा में रहा है। कारण बना विश्विद्यालय परिसर में लगातार बढ़ रही धरना-प्रदर्शन और साथ ही लग रहे देश विरोधी नारे। शांतिपूर्ण विरोध के उलट परिसर में प्रदर्शन की आड़ में छात्रों के बीच मुठभेड़ और विश्विद्यालय में तोड़-फोड़ की वारदातें काफी बढ़ गयी हैं। इन्हीं वारदातों को विराम देने के लिए जेएनयू प्रशासन ने जुर्माने के प्रावधान को लागू कर दिया है। विश्वविद्यालय के छात्रों को संस्थान के सदस्यों के घर के आसपास या किसी शैक्षणिक और प्रशासनिक भवन के 100 मीटर के दायरे में विरोध प्रदर्शन या हिंसा का सहारा लेते हुए पाए जाने पर 20,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा। यही नहीं छात्रों को “राष्ट्र-विरोधी” नारे लगाने और धर्म, जाति या समुदाय के प्रति असहिष्णुता भड़काने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
JNU में जारी हुआ कंडक्ट मैनुअल!
विश्विद्यालय द्वारा छात्रों के लिए कंडक्ट मैन्युअल जारी किया गया है। मैनुअल में 28 प्रकार की अस्वीकार्य गतिविधियां सूचीबद्ध की गयी है। इनमें नाकेबंदी, जुआ, छात्रावास के कमरों पर अनधिकृत कब्जा, अपमानजनक भाषा का उपयोग और जालसाजी शामिल है। मैनुअल के अनुसार, बिना अनुमति के विश्वविद्यालय परिसर में फ्रेशर्स की स्वागत पार्टियों, विदाई या डिस्क जॉकी कार्यक्रमों जैसे कार्यक्रम आयोजित करने पर छात्रों पर 6,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है या उन्हें विश्वविद्यालय में सामुदायिक सेवा भी करनी पड़ सकती है। इसी के साथ यदि किसी छात्र को उसके अध्ययन की पूरी अवधि के दौरान पाँच या अधिक सज़ाएँ दी जाती हैं, तो उसे निष्कासित कर दिया जाएगा।
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छात्र संघ को फैसला स्वीकार्य नहीं!
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ ने कहा है कि इस मैनुअल का उद्देश्य “दशकों से जेएनयू को परिभाषित करने वाली जीवंत परिसर संस्कृति को दबाना” है।छात्र संघ ने कहा की इस तरह के नियमों का उद्देश्य खुली चर्चा, असहमति और बौद्धिक अन्वेषण को हतोत्साहित करना है, जो हमारे विश्वविद्यालय की भावना के लिए मौलिक हैं। इसके साथ ही छात्र संगठन ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत ही इस मैनुअल को रद्द करे।